वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत चुमुर में लद्दाख का पहला मॉडल सीमावर्ती गाँव
लद्दाख के उपराज्यपाल, श्री विनय कुमार सक्सेना ने भारत सरकार के महत्वाकांक्षी ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ (VVP) के तहत चुमुर में पहले आदर्श सीमावर्ती गाँव (Model Border Village) की आधारशिला रखी। भारत-चीन सीमा पर 16,700 फीट की ऊँचाई पर स्थित, चुमुर में 24 परिवार रहते हैं, जिनकी कुल आबादी 91 है। ये सभी लोग पश्मीना पालन और उत्पादन के कार्य में लगे हुए हैं। चुमुर के साथ शुरुआत करते हुए, VVP के पहले चरण में ऐसे 10 सीमावर्ती गाँवों को ‘आदर्श सीमावर्ती गाँवों’ के रूप में विकसित किया जाएगा।
यह परियोजना, जो लद्दाख में अपनी तरह की पहली और भारत के अग्रणी आदर्श सीमावर्ती गाँवों में से एक है, विकास के चार प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित होगी – बुनियादी ढाँचा, रोजगार और आजीविका सृजन, हर मौसम में कार्यक्षमता, और नागरिक-रक्षा एकीकरण। इस परियोजना की परिकल्पना चुमुर को एक आत्मनिर्भर, जलवायु-अनुकूल, पर्यटन-सक्षम और आर्थिक रूप से जीवंत सीमावर्ती बस्ती के रूप में विकसित करने के लिए की गई है।
इस कार्यक्रम के तहत, इन गाँवों के परिवारों को जलवायु-अनुकूल, दक्षिण-मुखी ‘पैसिव सोलर हाउस’ (passive solar houses) प्रदान किए जाएंगे। इन्हें इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि ये सौर ताप को अधिकतम अवशोषित कर सकें और कड़ाके की ठंड से बचा सकें, जब कड़ाके की सर्दियों के दौरान तापमान -35 डिग्री तक गिर जाता है। प्रत्येक परिवार को एक आवासीय इकाई दी जाएगी जिसमें एक संलग्न बाथरूम, होमस्टे गतिविधियों के लिए एक अतिरिक्त कमरा, किचन गार्डन के लिए जगह, पशुओं के लिए शेड और चारा भंडारण की समर्पित सुविधा होगी। मौसम की स्थिति के अधीन, इन घरों के इस साल सितंबर तक पूरा होने की उम्मीद है।


