कंपनियां ‘जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल (ZCZP)’ इंस्ट्रूमेंट्स के जरिए 10% तक CSR फंड्स व्यय कर सकती हैं
केंद्रीय कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) ने कंपनी अधिनियम, 2013 की अनुसूची VII के दायरे का विस्तार करते हुए कंपनियों को अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) खर्च का एक हिस्सा ‘ज़ीरो कूपन ज़ीरो प्रिंसिपल’ (ZCZP) इंस्ट्रूमेंट्स के माध्यम से खर्च करने की अनुमति दी है। यह निर्णय ZCZP इंस्ट्रूमेंट्स को प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956 के तहत औपचारिक रूप से प्रतिभूतियों (securities) के रूप में मान्यता मिलने के लगभग चार साल बाद आया है।
जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल इंस्ट्रूमेंट के माध्यम से CSR के कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाने के लिए, CSR नीति नियम, 2014 में संशोधन किया गया है। इसके तहत नियम 2 में ‘नॉट फॉर प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन’ (गैर-लाभकारी संगठन) और ‘जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल इंस्ट्रूमेंट’ की परिभाषा शामिल की गई है, और नियम 4A में ZCZP के माध्यम से CSR कार्यान्वयन के मानदंड निर्धारित किए गए हैं।
MCA द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, कंपनियां अब अपने वार्षिक CSR खर्च का 10 प्रतिशत तक ZCZP इंस्ट्रूमेंट्स के माध्यम से चैनल कर सकेंगी। इस संशोधन का उद्देश्य कंपनियों के लिए अनुपालन (compliance) को आसान बनाना है और इससे गैर-लाभकारी संगठनों (NPOs) को सार्वजनिक कल्याणकारी परियोजनाओं के लिए पारदर्शी और विनियमित तरीके से धन जुटाने में मदद मिलेगी। ये NPO भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमों के अनुसार सोशल स्टॉक एक्सचेंज (SSE) पर ZCZP इंस्ट्रूमेंट जारी कर सकेंगे।
ज़ीरो-कूपन बॉन्ड
सामान्यतः, एक ज़ीरो-कूपन बॉन्ड धारक को कोई ब्याज नहीं देता है। ज़ीरो-कूपन बॉन्ड को अंकित मूल्य (face value) पर भारी छूट पर खरीदा जाता है और परिपक्वता (maturity) पर पूर्ण अंकित मूल्य पर चुकाया जाता है। निवेश पर रिटर्न खरीद मूल्य और अंकित मूल्य के बीच का अंतर होता है।
सोशल स्टॉक एक्सचेंज
सोशल स्टॉक एक्सचेंज के संदर्भ में, ‘ज़ीरो कूपन ज़ीरो प्रिंसिपल’ इंस्ट्रूमेंट न तो स्टॉक हैं और न ही बॉन्ड। यह एक वित्तीय साधन है जिसे SEBI द्वारा जारी नियमों और परिपत्रों के अनुपालन में, सोशल स्टॉक एक्सचेंज सेगमेंट के तहत पंजीकृत एक गैर-लाभकारी संगठन द्वारा जारी किया जाता है। इसे केवल किसी विशिष्ट परियोजना या गतिविधि के लिए ही जारी किया जा सकता है जो SEBI (ICDR) विनियम, 2018 के विनियमन 292E में उल्लिखित पात्र गतिविधियों में से एक हो, और इसे निर्धारित परियोजना अवधि का पालन करना अनिवार्य है। ZCZP इंस्ट्रूमेंट्स कोई निश्चित ब्याज या मूलधन की वापसी का वादा नहीं करते हैं, लेकिन वे फंड देने वाले को एक ‘सामाजिक रिटर्न’ (social return) का वादा करते हैं।
2022 में, भारत ने NSE और BSE के भीतर एक विनियमित सामाजिक पूंजी मंच बनाया: ‘सोशल स्टॉक एक्सचेंज’ (SSE)। इस पहल को सत्यापित गैर-लाभकारी संगठनों को उन निवेशकों के साथ जोड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया था जो देश के सामाजिक विकास में निवेश करना चाहते हैं।


