सिकुड़ता कैस्पियन सागर

जून 2026 में प्रकाशित एक अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि कैस्पियन सागर (Caspian Sea), जो विश्व का सबसे बड़ा स्थल-आवेष्ठित (Landlocked) अंतर्देशीय जल निकाय है, तेजी से सिकुड़ रहा है।

अध्ययन के अनुसार, इसके प्रमुख कारण हैं—

  • नदियों से आने वाले जल में कमी, जो मुख्य रूप से बांधों के निर्माण, नदी मोड़ परियोजनाओं और अत्यधिक जल दोहन के कारण हो रही है।
  • जलवायु परिवर्तन के कारण वाष्पीकरण (Evaporation) में वृद्धि।
  • अध्ययन में यह भी बताया गया कि 20वीं शताब्दी के मध्य से कैस्पियन सागर के सतही जल का औसत तापमान लगभग 1°C बढ़ चुका है, जिससे पारिस्थितिकीय परिवर्तन तेज हो गए हैं।

कैस्पियन सागर के बारे में

  • कैस्पियन सागर पृथ्वी का सबसे बड़ा बंद (Enclosed) अंतर्देशीय जल निकाय है।
  • इसका क्षेत्रफल लगभग 3.71 लाख वर्ग किलोमीटर है।
  • इसे “सागर” कहा जाता है, लेकिन किसी महासागर से जुड़ा न होने के कारण इसे दुनिया की सबसे बड़ी झील भी माना जाता है।
  • इसमें खारा (लवणीय) जल पाया जाता है।
  • इसमें लगभग 130 नदियाँ गिरती हैं।
  • रूस की वोल्गा नदी (Volga River) अकेले लगभग 80% ताजे जल की आपूर्ति करती है।
  • यह यूरोप और एशिया के बीच स्थित है।
  • इसकी तटरेखा (Coastline) लगभग 6,819 किलोमीटर लंबी है।

कैस्पियन सागर से लगे पांच तटीय देश

  1. रूस 
  2. कज़ाख़िस्तान 
  3. तुर्कमेनिस्तान 
  4. ईरान 
  5. अज़रबैजान 

पारिस्थितिकीय महत्व

  • संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुसार, दुनिया में बची हुई स्टर्जन (Sturgeon) मछलियों की लगभग 90% प्रजातियाँ कैस्पियन सागर में पाई जाती हैं, जिनमें से कई विलुप्ति के खतरे का सामना करना पड़ रहा है।
  • जलस्तर घटने से नदी डेल्टा (River Delta) प्रभावित हो रहे हैं, जिससे स्टर्जन मछलियों के लिए प्रजनन (Breeding) हेतु नदी के ऊपरी हिस्सों तक पहुँचना कठिन हो गया है।

तेहरान कन्वेंशन के बारे में

  • कैस्पियन सागर के समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा के लिए रूपरेखा अभिसमय (Framework Convention for the Protection of the Marine Environment of the Caspian Sea), जिसे तेहरान कन्वेंशन कहा जाता है, वर्ष 2003 में हस्ताक्षरित किया गया।
  • इस पर कैस्पियन सागर से लगे सभी पाँच देशों ने हस्ताक्षर किए।
  • इसका उद्देश्य कैस्पियन सागर के समुद्री पर्यावरण का संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग, तथा पाँचों देशों के बीच संयुक्त एवं बहुपक्षीय प्रबंधन (Multilateral Management) को बढ़ावा देना है।
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