BOHR-दुनिया का पहला वाणिज्यिक परमाणु-ऊर्जा संचालित उपग्रह

7 जुलाई 2026 को स्पेसएक्स ने ट्रांसपोर्टर-17 मिशन के तहत 81 पेलोड के साथ एक स्मॉलसैट राइडशेयर मिशन लॉन्च किया।

  • इस मिशन में सिटी लैब्स द्वारा विकसित BOHR (बीटावोल्टाइक ऑर्बिटल हाई-रिलायबिलिटी) उपग्रह भी शामिल था।
  • BOHR को दुनिया का पहला वाणिज्यिक परमाणु-ऊर्जा संचालित उपग्रह तथा पहला परमाणु क्यूबसैट (Nuclear CubeSat) माना जा रहा है।
  • यह मिशन अंतरिक्ष में City Labs की नैनोट्रिटियम बीटावोल्टाइक माइक्रोपावर सोर्स तकनीक का पहला प्रदर्शन  है।

नैनोट्रिटियम बीटावोल्टाइक तकनीक कैसे काम करती है?

  • यह तकनीक ट्रिटियम (Tritium) का उपयोग करती है, जो हाइड्रोजन का एक रेडियोधर्मी समस्थानिक (Radioactive Isotope) है।
  • ट्रिटियम के रेडियोधर्मी क्षय के दौरान निकलने वाले बीटा कण को एक अर्धचालक  उपकरण की सहायता से सीधे विद्युत ऊर्जा   में परिवर्तित किया जाता है।
  • इस प्रक्रिया में ऊष्मा (Heat) के बजाय सीधे बीटा कणों से बिजली उत्पन्न होती है।

BOHR की ऊर्जा व्यवस्था

  • उपग्रह के सामान्य संचालन  के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग किया जाता है।
  • जबकि NanoTritium Betavoltaic Battery का उपयोग इस नई तकनीक के प्रदर्शन और परीक्षण के लिए किया जा रहा है।

RTG से कैसे अलग है?

  • यह तकनीक रेडियोआइसोटोप थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर (RTG) से भिन्न है।
  • RTG, जिसका उपयोग नासा (NASA) के Voyager जैसे अंतरिक्ष यानों में किया गया है, प्लूटोनियम (Plutonium) के रेडियोधर्मी क्षय से उत्पन्न ऊष्मा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है।
  • इसके विपरीत, Betavoltaic तकनीक में बीटा कणों को सीधे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है, जिससे यह छोटे उपग्रहों (CubeSats) के लिए अधिक उपयुक्त विकल्प बनती है।

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