विश्व स्वास्थ्य सभा ने पहली बार स्ट्रोक को पब्लिक हेल्थ प्राथमिकता के रूप में मान्यता दी
22 मई को विश्व स्वास्थ्य सभा (WHA) ने ‘स्ट्रोक’ (पक्षाघात) पर अपना पहला ऐतिहासिक संकल्प अपनाया। यह संकल्प सदस्य देशों से स्ट्रोक को एक पब्लिक हेल्थ प्राथमिकता के रूप में मान्यता देने और इसकी देखभाल के हर चरण में राष्ट्रीय नीतियों को मजबूत करने का आग्रह करता है।
संकल्प के मुख्य बिंदु:
- व्यापक देखभाल: इसमें स्ट्रोक की रोकथाम, जोखिम कारकों पर नियंत्रण, समय पर आपातकालीन उपचार, व्यापक पुनर्वास और दीर्घकालिक सहायता शामिल है।
- प्रायोजक: इस संकल्प को मिस्र द्वारा प्रस्तावित किया गया था, और चिली, जॉर्जिया, फिलिस्तीन, पराग्वे तथा ट्यूनीशिया द्वारा सह-प्रायोजित किया गया था। यह WHO के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करता है।
स्ट्रोक: एक गंभीर स्वास्थ्य संकट
- परिभाषा: स्ट्रोक एक चिकित्सीय आपात स्थिति है जो तब होती है जब मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह रुक जाता है (रुकावट या रक्तस्राव के कारण)। इससे मस्तिष्क की कोशिकाएं मरने लगती हैं और गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं।
- प्रभाव: हर साल लगभग 1.2 करोड़ (12 मिलियन) लोग स्ट्रोक से प्रभावित होते हैं। इनमें से आधे से अधिक की मृत्यु हो जाती है, और जीवित बचने वालों में से तीन में से दो लोग किसी न किसी स्थायी दिव्यांगता का शिकार हो जाते हैं।
- बढ़ता खतरा: पिछले 20 वर्षों में स्ट्रोक का आजीवन खतरा 50% तक बढ़ गया है। अब स्थिति यह है कि हर 4 में से 1 वयस्क को अपने जीवनकाल में स्ट्रोक होने की आशंका है।
- वैश्विक आंकड़े (2021): स्ट्रोक दुनिया भर में मृत्यु और दिव्यांगता का तीसरा प्रमुख कारण था, जिसके तहत 9.38 करोड़ (93.8 मिलियन) मामले दर्ज किए गए, जिनमें 1.19 करोड़ (11.9 मिलियन) नए मामले शामिल थे।
लक्ष्य और भविष्य की कार्रवाई:
यह संकल्प स्ट्रोक के बोझ को कम करने के लिए राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रभावी कार्रवाई की अपेक्षा करता है। साथ ही, यह ‘WHO ग्लोबल NCD एक्शन प्लान 2023–2030’ और ‘मिर्गी तथा अन्य न्यूरोलॉजिकल विकारों पर अंतर-क्षेत्रीय वैश्विक कार्य योजना 2022–2031’ के माध्यम से जवाबदेही तय करने पर भी जोर देता है।


