केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित निर्यातकों के लिए RELIEF योजना शुरू की
सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के कारण फंसे हुए माल, या अगले कुछ महीनों में खाड़ी देशों को निर्यात की योजना बना रहे निर्यातकों को क्रेडिट इंश्योरेंस कवर (ऋण बीमा सुरक्षा) प्रदान करने के लिए रेज़िलिएंस एंड लॉजिस्टिक इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट प्रमोशन (RELIEF) योजना शुरू की है।
यह योजना उस ‘निर्यात प्रोत्साहन मिशन’ (Export Promotion Mission) का हिस्सा होगी जिसकी घोषणा बजट 2025 में की गई थी और जिसे 2025-26 के दौरान लागू किया गया था। इस योजना के तहत बीमा प्रीमियम संघर्ष-पूर्व (pre-conflict) दरों पर होगा और इसका मुख्य ध्यान MSME लाभार्थियों पर होगा। निर्यातकों को प्रीमियम में बिना किसी वृद्धि के 100 प्रतिशत तक कवरेज मिलेगा, जिसका अतिरिक्त खर्च सरकार वहन करेगी। यह योजना पूर्ण, आंशिक और रेफ्रिजरेटेड कंटेनरों को भी कवर करती है, जिससे विशेष रूप से MSMEs को सहायता और आपूर्ति श्रृंखला की निरंतरता सुनिश्चित होती है।
RELIEF योजना को तीन भागों में विभाजित किया गया है:
- पहला घटक (₹56 करोड़): यह उन निर्यातकों के लिए है जिनके पास पहले से ही ECGC लिमिटेड (पूर्व में एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) से क्रेडिट इंश्योरेंस कवर मौजूद है। ECGC पूर्ण रूप से वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के स्वामित्व में है। यह केवल संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान, बहरीन, इराक, ईरान, इजरायल और यमन को जाने वाली खेप (consignments) पर लागू होगा।
- दूसरा घटक (₹159 करोड़): यह उन निर्यातकों के लिए है जिन्होंने अभी तक ECGC कवर नहीं लिया है और जो अगले तीन महीनों में प्रभावित देशों को निर्यात करना चाहते हैं। इस घटक के तहत, ECGC सत्यापन के अधीन, होने वाले नुकसान के 95% तक का कवर प्रदान करेगा।
- तीसरा और सबसे बड़ा घटक (₹282 करोड़): यह विशेष रूप से उन MSME निर्यातकों के लिए है जो अब तक प्रभावित हुए हैं और जिन्होंने अभी तक ECGC कवर का लाभ नहीं लिया है। यह 14 फरवरी से 15 मार्च, 2026 के बीच की खेप पर लागू होता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि केवल MSMEs ही इस तीसरे घटक का लाभ उठा सकें, सहायता की राशि प्रति निर्यातक ₹50 लाख तक सीमित (cap) की गई है।


