बांग्लादेश ने तीस्ता जल बंटवारा समझौते पर विचार करने की तत्काल आवश्यकता जताई

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद, बांग्लादेश ने “वर्तमान परिस्थितियों” के तहत लंबे समय से लंबित तीस्ता जल बंटवारा समझौते पर विचार करने का तत्काल आह्वान किया है। भारत और बांग्लादेश के बीच जल बंटवारा लंबे समय से तनाव का स्रोत रहा है, जो सीमा पार करने वाली 54 नदियों के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ और विवाद

  • चार दशक पुराना विवाद: तीस्ता नदी को लेकर विवाद 40 से अधिक वर्षों से चला आ रहा है।
  • 1983 का अस्थायी समझौता: 1983 में एक अस्थायी व्यवस्था की गई थी, जिसके तहत सूखे के मौसम (dry season) के प्रवाह का 36% बांग्लादेश को और 39% भारत को आवंटित किया गया था। हालांकि, यह कभी स्थायी संधि में नहीं बदल सका।
  • 2011 का प्रस्तावित समझौता: तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ढाका यात्रा के दौरान एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर होने वाले थे। संशोधित शर्तों के तहत भारत को 42.5% और बांग्लादेश को 37.5% जल मिलना तय हुआ था।
  • पश्चिम बंगाल का विरोध: उस समय पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस समझौते को यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि नदी में साझा करने के लिए पर्याप्त पानी नहीं है।

तीस्ता नदी का भूगोल

  • उत्पत्ति और मार्ग: तीस्ता नदी ब्रह्मपुत्र की मुख्य ‘दाहिने किनारे’ की सहायक नदी है। यह उत्तर सिक्किम हिमालय में 5030 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चो ल्हामो (Tso Lhamo) झील से निकलती है।
  • विद्युत क्षमता: अपनी अत्यधिक ऊंचाई और प्रवाह के कारण, इस नदी में जलविद्युत (hydroelectricity) उत्पन्न करने की बड़ी क्षमता है।
  • प्रवाह क्षेत्र: यह नदी बांग्लादेश में प्रवेश करने से पहले भारतीय राज्यों सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर बहती है, जहाँ यह जमुना नदी (ब्रह्मपुत्र) में मिल जाती है।
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