संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण आर्थिक लेखा प्रणाली (SEEA)

संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण आर्थिक लेखा प्रणाली (System of Environmental Economic Accounts : SEEA) एक सांख्यिकीय ढांचा है। यह आर्थिक और पर्यावरणीय जानकारी को एक साझा ढांचे में लाता है ताकि पर्यावरण की स्थिति, अर्थव्यवस्था में पर्यावरण के योगदान और पर्यावरण पर अर्थव्यवस्था के प्रभाव को मापा जा सके। 

SEEA की मुख्य विशेषताएं

  • मानकीकृत ढांचा: SEEA में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहमत मानक अवधारणाएं, परिभाषाएं, वर्गीकरण, लेखांकन नियम और तालिकाएं शामिल हैं। इसका उद्देश्य ऐसी सांख्यिकी तैयार करना है जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुलना की जा सके।
  • बहुउद्देशीय प्रणाली: यह प्रणाली कोई विशिष्ट ‘इंडिकेटर’ (सूचक) प्रस्तावित नहीं करती है। इसके बजाय, यह एक समग्र सूचना प्रणाली है जो विभिन्न प्रकार के सांख्यिकीय आंकड़ों और संकेतकों को जन्म दे सकती है, जिनका उपयोग अलग-अलग विश्लेषणों में किया जा सकता है।
  • तीन मुख्य भाग:
    1. SEEA सेंट्रल फ्रेमवर्क: इसे 2012 में अपनाया गया था।
    2. SEEA इकोसिस्टम अकाउंटिंग: यह पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिति और सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करता है।
    3. SEEA एप्लिकेशन और एक्सटेंशन: यह डेटा के विश्लेषण और विस्तार पर केंद्रित है। 

कानूनी स्थिति और भारत का रुख

  • वैश्विक स्थिति: SEEA वैश्विक स्तर पर कड़ाई से कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है, लेकिन यह पर्यावरण-आर्थिक डेटा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहमत आधिकारिक सांख्यिकीय मानक है।
  • भारत में कार्यान्वयन: भारत के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने 2018 में UN SEEA ढांचे को अपनाया। यह पर्यावरण आर्थिक खातों के संकलन के लिए एक स्वीकृत अंतरराष्ट्रीय फ्रेमवर्क के रूप में कार्य करता है। 

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

लाभविवरण
सतत विकासयह समझने में मदद करता है कि आर्थिक विकास प्राकृतिक संसाधनों को कैसे प्रभावित कर रहा है।
नीति निर्धारणसरकारों को साक्ष्य-आधारित नीतियां बनाने में मदद मिलती है (जैसे पानी, ऊर्जा और वन प्रबंधन)।
जलवायु परिवर्तनयह ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और अर्थव्यवस्था के बीच के संबंध को ट्रैक करने में मदद करता है।
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