भारतीय मुद्रा पर-नेट ओपन पोजीशन (Net Open Position – NOP-INR)

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में बैंकों को विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय मुद्रा पर अपनी नेट ओपन पोजीशन (Net Open Position – NOP-INR) को प्रत्येक दिन के अंत तक 100 मिलियन डॉलर तक सीमित करने का निर्देश दिया है। अधिकृत डीलरों को 10 अप्रैल, 2026 तक इस नियम का पालन करने के लिए कहा गया है। यह कदम पश्चिम एशिया संघर्ष के मद्देनजर तेल की कीमतों में वृद्धि और मुद्रास्फीति (inflation) की आशंकाओं के बीच रुपये के गिरते मूल्य को लेकर चिंता से प्रेरित है।

RBI के इस कदम का मुख्य उद्देश्य:

  • रुपये को स्थिर करना: गिरते रुपये की विनिमय दर को संभालना।
  • विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा: पिछले एक महीने में संघर्ष शुरू होने के बाद से घटे विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को बचाना।
  • रणनीति में बदलाव: RBI ने अपने “वार चेस्ट” (विदेशी मुद्रा भंडार) को सुरक्षित रखने के लिए बाजार में सीधे हस्तक्षेप करने के बजाय विनियामक सख्ती (regulatory tightening) का रास्ता चुना है।

NOP-INR क्या है और यह कैसे काम करता है?

नेट ओपन पोजीशन (Net Open Position) उस विदेशी मुद्रा राशि को दर्शाती है जिसे एक बैंक ने खरीदा या बेचा है लेकिन अभी तक उसके विपरीत लेनदेन (Hedge) करके बराबर नहीं किया है।

  • पुरानी सीमा: पहले बैंक अपनी कुल पूंजी के 25% तक नेट ओपन पोजीशन रख सकते थे, जो नई सीमा की तुलना में काफी अधिक थी।
  • अस्थिरता पर नियंत्रण: बैंक अक्सर बड़े FX बुक रखते हैं जहाँ कुछ स्थितियों का उपयोग ‘आर्बिट्राज’ (मुनाफाखोरी) के लिए किया जाता है। इन बैंकों द्वारा रखी गई बड़ी अनहेज्ड (unhedged) पोजीशन के कारण दिन के दौरान मुद्रा में तेज उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। नई सीमा इन उतार-चढ़ावों को रोकने में मदद करेगी।

ऐतिहासिक संदर्भ: यह पहली बार नहीं है जब RBI ने ऐसा कदम उठाया है। दिसंबर 2011 में RBI ने रुपये पर सट्टेबाजी को कम करने के लिए कुछ बैंकों की ओपन पोजीशन में 75% तक की कटौती की थी। उस समय RBI ने ओवरनाइट पोजीशन निर्धारित करने की बोर्ड की शक्तियों को अपने हाथ में ले लिया था और ‘फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स’ को रद्द करने या फिर से बुक करने की बैंकों की लचीलापन को भी खत्म कर दिया था। इन उपायों से रुपये को अपने नुकसान की भरपाई करने में मदद मिली थी।

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