काउंटरसाइक्लिकल कैपिटल बफर

भारतीय रिज़र्व बैंक ने कहा है कि वह ‘काउंटरसाइक्लिकल कैपिटल बफर’ (CCyB) को सक्रिय नहीं करेगा, क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों में इस उपाय की आवश्यकता नहीं है।  

CCyB संकेतकों (जिसमें मुख्य संकेतक के रूप में क्रेडिट-टू-GDP गैप शामिल है) की समीक्षा और अनुभवजन्य विश्लेषण के बाद, RBI ने कहा है कि इस समय CCyB को सक्रिय करना आवश्यक नहीं है।

काउंटरसाइक्लिकल कैपिटल बफर के दो मुख्य उद्देश्य हैं:

  • प्रथम: यह बैंकों से अपेक्षा करता है कि वे अच्छे समय में पूंजी का एक बफर (रिजर्व) तैयार करें, जिसका उपयोग कठिन समय में ऋण के प्रवाह को बनाए रखने के लिए किया जा सके।
  • द्वितीय: यह  व्यापक-विवेकपूर्ण (macro-prudential) लक्ष्य को प्राप्त करता है, ताकि बैंकिंग क्षेत्र को अत्यधिक ऋण वृद्धि की अवधि के दौरान अंधाधुंध ऋण देने से रोका जा सके, जो अक्सर पूरे सिस्टम के जोखिम (system-wide risk) के निर्माण से जुड़े होते हैं।

काउंटरसाइक्लिकल कैपिटल बफर (CCyB) बेसल-III ढांचे के तहत एक व्यापक वित्तीय सुरक्षा उपाय है, जिसका उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र को पूरे वित्तीय तंत्र से जुड़े जोखिमों से बचाना है। इसके तहत बैंकों को आर्थिक विकास के समय अतिरिक्त पूंजी जमा करनी होती है, ताकि आर्थिक मंदी या वित्तीय संकट के दौरान उस पूंजी का उपयोग नुकसान की भरपाई के लिए किया जा सके।

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