मेघालय में खासी और गारो को राजकीय भाषाओं का दर्जा
मेघालय कैबिनेट ने 16 अप्रैल (2026) को एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए राज्य की स्वदेशी खासी (Khasi) और गारो (Garo) भाषाओं को अंग्रेजी के अतिरिक्त राज्य की राजकीय भाषाओं के रूप में घोषित किया है।
यह कदम राज्य की दो सबसे बड़ी जनजातियों की इन भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की लंबे समय से चली आ रही मांग के बीच उठाया गया है।
इस निर्णय के मुख्य प्रभाव:
- आधिकारिक कामकाज: अब तक मेघालय में सारा सरकारी कामकाज केवल अंग्रेजी में होता था। इस निर्णय के बाद अब सरकारी संचार और कार्यों में खासी और गारो भाषाओं का उपयोग किया जा सकेगा।
- सांस्कृतिक पहचान: यह कदम राज्य की भाषाई विरासत को संरक्षित करने और शासन में स्थानीय भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
संवैधानिक मांग: वर्तमान में, ये भाषाएं राज्य स्तर पर आधिकारिक दर्जा प्राप्त कर चुकी हैं, जो भविष्य में इन्हें राष्ट्रीय स्तर पर संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के प्रयासों को और मजबूती प्रदान करेगा।


