हीरो मोटोकॉर्प की पहली फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिलें लॉन्च

फ्लेक्स-फ्यूल वाहन भारत के लिए कच्चे तेल के आयात को कम करने, इथेनॉल की मांग के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और ‘लो-कार्बन मोबिलिटी’ (कम प्रदूषण वाला परिवहन) को आगे बढ़ाने का एक व्यावहारिक समाधान पेश करते हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने इसे भारत के ऊर्जा इतिहास का एक नया अध्याय बताया है।

मुख्य विशेषताएं:

  • नए मॉडल: ‘स्प्लेंडर+’ (Splendor+) और ‘एचएफ डीलक्स’ (HF Deluxe) फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिलें E20 से E85 तक के इथेनॉल मिश्रण के साथ चलने में सक्षम हैं। यह भारत के मास-मार्केट में आत्मनिर्भर फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की शुरुआत है।
  • इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम (EBP) के लाभ: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ESY 2014-15 से अब तक:
    • विदेशी मुद्रा में ₹1.84 लाख करोड़ की बचत हुई है।
    • 302 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात में कमी आई है।
    • 909 लाख मीट्रिक टन CO₂ (कार्बन डाइऑक्साइड) उत्सर्जन में कमी आई है।

फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के फायदे

  • लागत और बुनियादी ढांचा: इनका निर्माण सस्ता है और इनका रोलआउट (प्रसार) इलेक्ट्रिक वाहन नेटवर्क की तुलना में लगभग 10-15 गुना तेज है।
  • पूर्ण आत्मनिर्भरता: इलेक्ट्रिक वाहनों के विपरीत, जिनमें बैटरी घटकों के लिए आयात पर निर्भरता होती है, फ्लेक्स-फ्यूल वाहन घरेलू जैव-ईंधन (biofuels) पर निर्भर हैं, जो इन्हें पूरी तरह ‘आत्मनिर्भर’ और कम कार्बन फुटप्रिंट वाला बनाता है।
  • किसानों को लाभ: इथेनॉल की मांग बढ़ने से सीधे तौर पर किसानों की आय में समर्थन मिलेगा।
  • नीति आयोग की स्थिति: नीति आयोग ने आधिकारिक तौर पर इथेनॉल-आधारित फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFVs) को ‘जीरो-एमिशन’ (शून्य उत्सर्जन) वाहनों के रूप में वर्गीकृत किया है। 
  • E85 को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के तहत फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए मोनो-फ्यूल मानक के रूप में पहचाना गया है।

फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक कैसे काम करती है?

  • लचीलापन (Flexibility): फ्लेक्स-फ्यूल इंजनों को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि वे इथेनॉल और पेट्रोल के साथ आसानी से मिश्रित हो सकें। आप ग्रामीण क्षेत्रों या राजमार्गों पर पेट्रोल का उपयोग कर सकते हैं और शहरी क्षेत्रों में इथेनॉल मिश्रण का उपयोग कर सकते हैं।
  • सेंसर तकनीक: इनमें लगे विशेष सेंसर ईंधन के प्रकार को भांप लेते हैं और इंजन की कार्यप्रणाली को उसी के अनुसार समायोजित कर लेते हैं।
  • संरचना: फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में एक आंतरिक दहन इंजन (Internal Combustion Engine) होता है। इनका ईंधन सिस्टम पारंपरिक गैसोलीन वाहनों के समान ही होता है, जो इन्हें सामान्य वाहनों की तरह ही विश्वसनीय बनाता है।
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