अभिलाषा बायोफ्यूल्स (ABF)

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत  ‘प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड’ (TDB) ने “2nd जेनरेशन डीजल इक्विवेलेंट बायोफ्यूल के निर्माण” नामक परियोजना के लिए एक कंपनी को सहायता प्रदान की है। इस परियोजना का उद्देश्य कृषि अपशिष्ट और कृषि-प्रसंस्करण अवशेषों से उन्नत जैव ईंधन (Biofuels) के उत्पादन के लिए एक वाणिज्यिक-स्तरीय सुविधा स्थापित करना है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा, ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ (अपशिष्ट से धन) मिशन और नेट-जीरो लक्ष्यों में योगदान देगा।

अभिलाषा बायोफ्यूल्स (ABF)

प्रस्तावित परियोजना में अभिलाषा बायोफ्यूल्स (ABF) के उत्पादन के लिए एक ग्रीनफील्ड विनिर्माण इकाई स्थापित करना शामिल है—जो कि डीजल और नेफ्था का अगली पीढ़ी का नवीकरणीय विकल्प है, जिसे पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक के माध्यम से विकसित किया गया है। इसे एक “ड्रॉप-इन” ईंधन के रूप में डिज़ाइन किया गया, यानी अभिलाषा बायोफ्यूल्स मौजूदा इंजनों, ईंधन प्रणालियों या वितरण बुनियादी ढांचे में किसी भी बदलाव की आवश्यकता के बिना पारंपरिक जीवाश्म-आधारित डीजल को सीधे प्रतिस्थापित कर सकता है। यह परिवहन और औद्योगिक ऊर्जा खपत को डीकार्बोनाइज़ करने के लिए एक व्यावहारिक और स्केलेबल समाधान है।

भारत में पूरी तरह से विकसित, यह तकनीक अभिनव थर्मो-केमिकल रूपांतरण प्रक्रियाओं को एकीकृत करती है, जो कृषि अवशेषों और कृषि-औद्योगिक कचरे को उच्च गुणवत्ता वाले नवीकरणीय ईंधन में बदल देती है। सेकेंड-जेनरेशन (2G) बायोफ्यूल उन्नत नवीकरणीय ईंधन हैं, जिन्हें गैर-खाद्य बायोमास से निर्मित किया जाता है, जैसे कि कृषि अवशेष (धान का पुआल, मकई का डंठल), वानिकी अपशिष्ट और विशेष ऊर्जा फसलें।

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