ब्लू स्ट्रैगलर तारे

भारतीय खगोलविदों ने भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए) के वैज्ञानिकों और उनके अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर एक ब्लू स्ट्रैगलर तारे (बीएसएस) की दुर्लभ खोज की है, जिसे उसके निर्माण की प्रक्रिया के दौरान देखा गया है। यह खोज इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण प्रदान करती है कि ऐसे तारों का निर्माण किस प्रकार होता है।

ब्लू स्ट्रैगलर तारे (बीएसएस) तारों के समूहों में पाए जाने वाले तारों की एक असामान्य श्रेणी हैं। ये अपने साथ मौजूद अन्य तारों की तुलना में अधिक गर्म, अधिक चमकीले और अधिक भारी दिखाई देते हैं। लंबे समय से खगोलविद इन तारों की उत्पत्ति और विकास को समझने का प्रयास कर रहे हैं।

सबसे व्यापक रूप से स्वीकार की गई व्याख्या के अनुसार, ये तारे अपने किसी साथी तारे से पदार्थ प्राप्त करके या तारों के विलय के माध्यम से अपना द्रव्यमान बढ़ाते हैं और इस प्रक्रिया में स्वयं को पुनर्जीवित कर लेते हैं।

खगोलविदों ने लगभग 9,500 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित पुराने खुले तारागुच्छ कॉलिंडर 261 में मौजूद एक उल्लेखनीय द्वितारा तंत्र टीआईसी 327546480 का अध्ययन किया।

वैज्ञानिकों ने पाया कि इस तंत्र में मौजूद ब्लू स्ट्रैगलर तारा अपने साथी तारे से सक्रिय रूप से पदार्थ प्राप्त कर रहा है। इससे खगोलविदों को पहली बार ऐसे ब्लू स्ट्रैगलर तारे को उसके निर्माण की प्रक्रिया के दौरान देखने का दुर्लभ अवसर मिला है।

CLICK HERE: UPSC (CSE) GS PRELIMS & MAINS CURRENT AFFAIRS BASED WEEKLY TEST (ENG & HINDI)

CLICK HERE FOR GS TIMES PRAHAR UPSC GS MAINS TEST SERIES 

दैनिक करेंट अफेयर्स क्विज़ (सभी परीक्षाओं के लिए) अभ्यास के लिए-यहां क्लिक करें

error: Content is protected !!