प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तावित ‘सप्तधारा’ रोडमैप क्या है?
80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने राष्ट्र से ‘सप्तधारा’ के रूप में परिभाषित शक्ति की सात धाराओं का उपयोग करने का आह्वान किया।
1. विनिर्माण शक्ति (Manufacturing Power): प्रधानमंत्री ने ‘विनिर्माण शक्ति’ को पहली और महत्वपूर्ण धारा बताते हुए विनिर्माण क्षेत्र के व्यापक विस्तार का आह्वान किया। उन्होंने छोटे-से-छोटे घटकों से लेकर बड़े से बड़े अंतिम उत्पादों तक संपूर्ण घरेलू मूल्य श्रृंखला में महारत हासिल करने पर जोर दिया। इसके लिए शून्य-दोष (Zero-Defect) परिशुद्धता, लागत दक्षता तथा वैश्विक स्तर और गुणवत्ता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को आवश्यक बताया गया।
2. कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण (Agriculture and Food Processing): दूसरी महत्वपूर्ण धारा के रूप में कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने देशव्यापी स्तर पर रसायन-मुक्त खेती की ओर संक्रमण का आह्वान किया। साथ ही, खेत से लेकर निर्यात बाजार तक एकीकृत कृषि-से-निर्यात आपूर्ति शृंखलाओं को विकसित करने पर जोर दिया, ताकि पारंपरिक भारतीय खाद्य उत्पादों को वैश्विक बाजारों में व्यापक अवसर मिल सकें।
3. प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (Technology and Innovation): तीसरी धारा के रूप में प्रौद्योगिकी एवं नवाचार को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को केवल वैश्विक बाजार बनने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नवाचार का वैश्विक केंद्र बनना चाहिए। इसके लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, उन्नत रोबोटिक्स, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और मेड-इन-इंडिया 6G जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में नेतृत्व करने पर जोर दिया गया।
4. गति शक्ति (Gati Shakti): ‘गति शक्ति’ को चौथी आवश्यक धारा बताते हुए प्रधानमंत्री ने निर्बाध बहु-माध्यमीय लॉजिस्टिक्स के निर्माण के लिए बुनियादी ढाँचे के व्यापक आधुनिकीकरण का आह्वान किया। इसमें हाई-स्पीड रेल, आधुनिक राजमार्ग, अंतर्देशीय जलमार्ग तथा बंदरगाहों को गतिशील पोर्ट-लेड डेवलपमेंट के केंद्रों में बदलना शामिल है।
5. रक्षा शक्ति (Defence Shakti): पाँचवीं महत्वपूर्ण धारा के रूप में ‘रक्षा शक्ति’ को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने पूर्ण रणनीतिक आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया। भारत का लक्ष्य अगली पीढ़ी की रक्षा प्रौद्योगिकियों में नवाचार करते हुए ड्रोन, काउंटर-ड्रोन प्रणाली और हाइपरसोनिक तकनीक जैसी क्षमताओं का विकास एवं निर्यात कर एक अग्रणी वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनना है।
राष्ट्रीय रक्षा के अभिन्न अंग के रूप में साइबर सुरक्षा पर भी बल देते हुए भारतीय युवाओं की विशाल डिजिटल क्षमता का उपयोग देश की डिजिटल सीमाओं और वैश्विक साइबर क्षेत्र की सुरक्षा के लिए करने का आह्वान किया गया।
6. हरित एवं नीली अर्थव्यवस्था (Green and Blue Economy): छठी धारा के रूप में हरित एवं नीली अर्थव्यवस्था को प्रस्तुत करते हुए प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन की चुनौती के समाधान में भारत को सक्रिय वैश्विक भूमिका निभाने वाला देश बनाने पर जोर दिया। ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण तथा महासागरीय एवं समुद्री संसाधनों की व्यापक क्षमता के विकास के साथ तटीय पर्यटन को बढ़ावा देकर बड़े पैमाने पर हरित रोजगार सृजित करने पर बल दिया गया।
7. सॉफ्ट पावर (Soft Power): सातवीं और अंतिम धारा के रूप में भारत की सॉफ्ट पावर को रेखांकित किया गया। प्रधानमंत्री ने योग को विश्व को एकजुट करने वाली वैश्विक ऊर्जा के रूप में प्रस्तुत करते हुए भारतीय विरासत, आयुर्वेद और पर्यटन के वैश्वीकरण पर जोर दिया। साथ ही, VFX, एनीमेशन, गेमिंग तथा WAVES Summit जैसे क्षेत्रों के माध्यम से क्रिएटिव इकोनॉमी में भारत के वैश्विक नेतृत्व को मजबूत करने का आह्वान किया गया।
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