सरकार ने जनसांख्यिकीय परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया
भारत सरकार ने घुसपैठ और अन्य कारणों से हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नावलेकर करेंगे।
समिति के सदस्य:
- अध्यक्ष: न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नावलेकर (पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज)।
- सदस्य: जनगणना आयुक्त (Census Commissioner), पूर्व आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, पूर्व आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और अर्थशास्त्री डॉ. शमिका रवि।
- सदस्य सचिव: गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव (विदेशी-I) इस समिति के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे।
समिति का उद्देश्य और महत्व:
गृह मंत्री ने कहा कि जनसांख्यिकीय परिवर्तन एक गंभीर मुद्दा है, जो केवल देश की संप्रभुता (Sovereignty) से ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, सामाजिक ढांचे में बड़े बदलाव और आदिवासी समाज के संरक्षण से भी जुड़ा है।
समिति के मुख्य कार्य:
- अवैध आप्रवासन और अन्य अप्राकृतिक कारणों से पूरे भारत में हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों का व्यापक आकलन करना।
- धार्मिक और सामाजिक समुदायों के स्तर पर असामान्य जनसंख्या बदलाव के पैटर्न का विश्लेषण करना।
- इन समस्याओं के समाधान के लिए एक योजनाबद्ध और समयबद्ध (time-bound) समाधान प्रस्तुत करना।


