लुक-आउट सर्कुलर और विदेश यात्रा का मूल अधिकार
उच्चतम न्यायालय (SC) ने 30 अप्रैल को एक व्यवसायी के खिलाफ सीबीआई (CBI) द्वारा जारी लुक-आउट सर्कुलर (LOC) को निलंबित कर दिया। उस व्यवसायी को निचली अदालत से विदेश यात्रा की अनुमति मिलने के बावजूद मुंबई हवाई अड्डे पर रोक दिया गया था। न्यायालय ने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) से ऐसे आदेश जारी करने की शक्ति पर जवाब भी मांगा है।
लुक-आउट सर्कुलर (LOC) क्या है?
लुक-आउट सर्कुलर हवाई अड्डों और अन्य निकास बिंदुओं पर आव्रजन (Immigration) अधिकारियों को भेजा जाने वाला एक संचार (Communication) है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति की निगरानी करना, उसे रोकना या देश से बाहर जाने से रोकना होता है।
मुख्य बिंदु:
- प्रकृति: यह कोई गिरफ्तारी वारंट नहीं है और न ही यह अदालत द्वारा जारी किया जाता है।
- प्रशासनिक उपकरण: यह केवल एक प्रशासनिक अलर्ट है जो किसी अधिकृत एजेंसी (जैसे CBI, सीमा शुल्क, पुलिस) के अनुरोध पर सक्रिय होता है।
- संचालन: इनका संचालन मुख्य रूप से गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जारी कार्यकारी निर्देशों (Executive Instructions) द्वारा होता है।
कानूनी और संवैधानिक आधार
- ऐतिहासिक संदर्भ: LOC से संबंधित कार्यालय ज्ञापन (Office Memos) 1979 और 2000 के दशक के हैं। 1979 के एक संचार के अनुसार, जब तक अन्यथा उल्लेख न किया जाए, ये सर्कुलर एक वर्ष के बाद अमान्य हो जाते हैं।
- वैधानिकता: हालांकि LOC किसी विशिष्ट कानून (Statute) द्वारा नहीं बनाए गए हैं, अदालतों ने इनका कानूनी आधार कार्यकारी निर्देशों और आपराधिक कानून के प्रावधानों में पाया है।
- विदेश यात्रा का मूल अधिकार: विदेश यात्रा का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार (Right To Life) का एक मान्यता प्राप्त मूल अधिकार है। चूंकि LOC इस स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करता है, इसलिए इसका उपयोग संवैधानिक रूप से वैध और उचित होना अनिवार्य है।
LOC जारी करने वाली कुछ प्रमुख एजेंसियां
| श्रेणी | उदाहरण |
| केंद्रीय एजेंसियां | CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो), ED (प्रवर्तन निदेशालय), IT (आयकर विभाग) |
| सुरक्षा एजेंसियां | IB (इंटेलिजेंस ब्यूरो), RAW (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) |
| अन्य | राज्य पुलिस, सीमा शुल्क (Customs), राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) |


