प्रोजेक्ट प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ के तहत तीन और चूजों का जन्म
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि ‘प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ (GIB) के तहत संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम में पिछले कुछ दिनों में तीन और चूजे जन्म लिए हैं, जिससे चौथे वर्ष में अब तक पैदा हुए चूजों की कुल संख्या 26 हो गई है।
क्रिटिकली एंडेंजर्ड ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Ardeotis nigriceps), जिसे राजस्थान में स्थानीय रूप से ‘गोडावण’ कहा जाता है, की शेष आबादी के संरक्षण के उद्देश्य से राजस्थान में 2013 में एक महत्वाकांक्षी संरक्षण कार्यक्रम ‘प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ शुरू किया गया था। यह पक्षी भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में, सीएमएस कन्वेंशन (CMS Convention) में, CITES के परिशिष्ट I में, IUCN रेड लिस्ट में ‘क्रिटिकली एंडेंजर्ड’ (Critically Endangered) के रूप में और राष्ट्रीय वन्यजीव कार्य योजना (2002-2016) में सूचीबद्ध है।
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के बारे में
नर और मादा सामान्यतः समान ऊंचाई और वजन के होते हैं, लेकिन नरों के सिर पर काले रंग का मुकुट (crown) बड़ा होता है और छाती पर एक काली पट्टी होती है। ये मुख्य रूप से मानसून के मौसम में प्रजनन करते हैं, जब मादा खुले मैदान में एक अंडा देती है। अंडों को सेने और चूजों की देखभाल में नर की कोई भूमिका नहीं होती है; बच्चे अगले प्रजनन के मौसम तक अपनी माँ के साथ ही रहते हैं। ये पक्षी अवसरवादी खाने वाले (opportunist eaters) होते हैं। इनका आहार भोजन की मौसमी उपलब्धता के आधार पर काफी भिन्न होता है।
GIB उड़ने वाले दुनिया के सबसे भारी पक्षियों में से एक है और कभी भारत के शुष्क और अर्ध-शुष्क घास के मैदानों में बड़ी संख्या में पाया जाता था। वर्तमान में इनकी आबादी मुख्य रूप से जैसलमेर (राजस्थान) तक सीमित है और कुछ ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (<10) कच्छ (गुजरात), सोलापुर (महाराष्ट्र), बल्लारी (कर्नाटक) और कुरनूल (आंध्र प्रदेश) में बचे हैं। यह राजस्थान का राजकीय पक्षी (स्टेट बर्ड) है।


