गुजरात के चोर्यासी में भारत का पहला ‘बैरियर-रहित’ टोल प्लाजा प्रारंभ
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने 1 मई को गुजरात में NH-48 के सूरत-भरूच खंड पर स्थित चोर्यासी टोल प्लाजा पर भारत की पहली मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) बाधा-रहित (barrier-less) टोलिंग प्रणाली शुरू की है। उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह के मामले में चोरयासी देश के शीर्ष 10 टोल प्लाजा में शामिल है।
यह भारत के इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (ETC) बुनियादी ढांचे में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिसकी शुरुआत 2014 में हुई थी।
MLFF प्रणाली की मुख्य विशेषताएं
- बाधा-रहित आवाजाही: वर्तमान में वाहनों को टोल प्लाजा पर शुल्क देने के लिए रुकना पड़ता है। MLFF प्रणाली ‘बूम बैरियर’ की आवश्यकता को समाप्त कर देती है, जिससे वाहनों को टोल संग्रह के लिए रुकने की जरूरत नहीं होगी।
- उन्नत तकनीक: टोल संग्रह के लिए इसमें उच्च प्रदर्शन वाले रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) रीडर और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों का उपयोग किया गया है। ये कैमरे चलते वाहन से ही FASTag और वाहन पंजीकरण संख्या (VRN) को पढ़ लेते हैं।
- विकास: चोर्यासी टोल संग्रह प्रणाली को ICICI बैंक द्वारा विकसित किया गया है।
- पीपीपी मॉडल: NHAI की टोल कार्यान्वयन एजेंसी, ‘इंडियन हाईवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड’ (IHMCL) और बैंक के बीच पिछले साल अगस्त में एक समझौता हुआ था। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस परियोजना पर सरकार को कोई खर्च नहीं करना पड़ा।
MLFF के लाभ
- समय की बचत: टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतारें खत्म होंगी।
- ईंधन की दक्षता: बार-बार रुकने और चलने (Stop-and-go) की प्रक्रिया न होने से ईंधन की खपत कम होगी।
- पर्यावरणीय प्रभाव: कम कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण।
सुचारू यातायात: राजमार्गों पर यात्रा का अनुभव अधिक निर्बाध और तेज होगा।


