कॉरपोरेट बॉन्ड का ब्लॉकचेन आधारित टोकनाइजेशन 

सेबी के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने मुंबई में ‘केयरएज डेट मार्केट समिट’ को संबोधित करते हुए कहा कि कॉरपोरेट बॉन्ड जोखिम-मुक्त नहीं होते हैं। इसके बावजूद, बाजार विनियामक (SEBI) भारतीय ऋण बाजार (डेट मार्केट) को मजबूत बनाने और निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए बड़े सुधारों की योजना बना रहा है।

मुख्य बातें:

  • ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग: सेबी कॉरपोरेट बॉन्ड के ‘टोकनाइजेशन’ (tokenisation) के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट पर विचार कर रहा है। इसका उद्देश्य सेटलमेंट (भुगतान) की गति, पारदर्शिता और पहुंच में सुधार करना है।
  • बाजार में वृद्धि: भारत का कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार काफी बढ़ा है। वित्त वर्ष 2015 में बकाया कॉरपोरेट बॉन्ड 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक थे, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 59 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गए हैं।

‘टोकनाइजेशन’ क्या है?

टोकन किसी संपत्ति या उपयोगिता का एक डिजिटल प्रतिनिधित्व है। ब्लॉकचेन तकनीक के संदर्भ में, टोकनाइजेशन का अर्थ है किसी मूल्यवान संपदा को एक डिजिटल टोकन में बदलना, जिसे ब्लॉकचेन एप्लिकेशन पर इस्तेमाल किया जा सके।

  • क्या टोकनाइज़ किया जा सकता है? कोई भी चीज़ जिसे संपत्ति माना जाता है, जिसका मूल्य है, और जिसे किसी बड़े बाजार का हिस्सा बनाया जा सकता है, उसे टोकनाइज़ किया जा सकता है।
    • मूर्त संपत्तियाँ: सोना, रियल एस्टेट, कला आदि।
    • अमूर्त संपत्तियाँ: वोटिंग अधिकार, मालिकाना हक, या कंटेंट लाइसेंसिंग।

कॉर्पोरेट बॉन्ड का टोकनाइजेशन: इसमें पारंपरिक कागजी या लेजर-आधारित ऋण इंस्ट्रूमेंट्स को डिजिटल टोकन में बदला जाता है। प्रत्येक टोकन कर्ज पर एक विशिष्ट दावे को दर्शाता है, जिसमें मालिकाना हक और लेनदेन का पूरा इतिहास ब्लॉकचेन (डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर) पर सुरक्षित और अपरिवर्तनीय रूप से दर्ज रहता है।

इसके मुख्य लाभ:

  • तेजी से सेटलमेंट: लेनदेन जल्दी पूरा होता है।
  • आंशिक स्वामित्व (Fractionalization): महंगे बॉन्ड को छोटे हिस्सों में खरीदा जा सकता है।
  • कम लागत: बिचौलियों की जरूरत कम होने से खर्च घटता है।
  • बेहतर लिक्विडिटी: बॉन्ड को खरीदना और बेचना आसान हो जाता है।
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