5वीं विश्व लघु-स्तरीय मात्स्यिकी कांग्रेस
5वीं विश्व लघु-स्तरीय मात्स्यिकी कांग्रेस 27 से 30 अप्रैल 2026 तक हुआ हिन, थाईलैंड में आयोजित की गई। इस कांग्रेस में भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग (मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय) के सचिव ने भी भाग लिया।
- विषय (Theme): “न्यायपूर्ण सद्भाव, युवा भविष्य और पुनर्योजी ज्ञान को आगे बढ़ाने के लिए लघु-स्तरीय मत्स्य पालन” (Small-scale fisheries for advancing just harmony, young futures, and regenerative wisdom)।
लघु-स्तरीय मात्स्यिकी (SSF) का महत्व
- वैश्विक प्रभाव: लघु-स्तरीय मात्स्यिकी वैश्विक मात्स्यिकी की रीढ़ है। यह दुनिया के लगभग 90% मछुआरों को रोजगार देता है और समुद्री व अंतर्देशीय मात्स्यिकी में लगभग 40% योगदान देता है।
- सामाजिक भूमिका: यह खाद्य सुरक्षा, पोषण, गरीबी उन्मूलन और लैंगिक समानता (विशेष रूप से मछली पकड़ने के बाद की गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी के माध्यम से) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- एशियाई संदर्भ: एशिया में मात्स्यिकी मुख्य रूप से बहु-प्रजाति, बहु-गियर और पारिवारिक प्रकृति का है, जो लाखों तटीय और अंतर्देशीय आजीविकाओं का समर्थन करता है।
भारत में मात्स्यिकीकी स्थिति
- व्यापकता: भारत में लगभग 40 लाख समुद्री मछुआरे हैं, जो मुख्य रूप से 12 समुद्री मील (nautical miles) तक के क्षेत्रीय जल में काम करते हैं।
- शासन: इस क्षेत्र को मुख्य रूप से राज्य समुद्री मत्स्यन विनियमन अधिनियमों (MFRAs) द्वारा शासित किया जाता है।
- नीतिगत ध्यान: हाल ही में भारत सरकार ने ‘मत्स्य सहकारी समितियों’ और ‘मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों’ (FFPOs) के माध्यम से संस्थानों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया है। इसे प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और EEZ नियम 2025 का समर्थन प्राप्त है।
मात्स्यिकी क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां
- वैश्विक रैंकिंग:
- दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक (वैश्विक उत्पादन में 8% योगदान)।
- एक्वाकल्चर (जलीय कृषि) उत्पादन में दूसरे स्थान पर।
- झींगा (Shrimp) उत्पादन और निर्यात में विश्व में अग्रणी।
- कैप्चर फिशरीज (Capture Fisheries) में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक।
- सरकारी निवेश: 2015 से अब तक विभिन्न योजनाओं के तहत कुल ₹39,272 करोड़ के निवेश को मंजूरी दी गई है।
प्रमुख योजनाएँ: नीली क्रांति (Blue Revolution), मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर बुनियादी ढांचा विकास कोष (FIDF), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PMMKSSY)।


