डॉप्लर वेदर रडार नेटवर्क का महत्वपूर्ण विस्तार

केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, भारत ने 2014 के बाद से अपने डॉप्लर वेदर रडार नेटवर्क का महत्वपूर्ण विस्तार किया है। परिचालन इकाइयों की संख्या 14 से बढ़कर 50 हो गई है, जो कि 250% से अधिक की वृद्धि है। 

  • व्याप्ति (Coverage): वर्तमान नेटवर्क देश के 87% से अधिक हिस्से को कवर करता है।
  • मिशन मौसम: ‘मिशन मौसम’ के तहत 50 और रडार स्थापित करने की योजना है।
  • सटीकता: ये रडार चक्रवात, भारी बारिश और गरज के साथ आने वाले तूफान के पूर्वानुमान में सुधार करते हैं। 

डॉप्लर वेदर रडार (DWR) कैसे काम करता है?

  1. डॉप्लर प्रभाव: यह तकनीक डॉप्लर प्रभाव का उपयोग करके मौसम प्रणालियों की गति और वेग को ट्रैक करती है।
  2. कार्यप्रणाली: रडार रेडियो तरंगें उत्सर्जित करता है और बारिश की बूंदों या कणों से टकराकर वापस आने वाली ऊर्जा के ‘फेज’ (phase) में होने वाले बदलाव का पता लगाता है। इससे यह पता चलता है कि कण रडार की ओर आ रहे हैं या उससे दूर जा रहे हैं।
  3. दोहरी ध्रुवीकरण तकनीक (Dual-polarization Technology): आईएमडी (IMD) द्वारा तैनात आधुनिक रडार इस तकनीक से लैस हैं।
    • सटीक पहचान: यह बारिश, ओले और बूंदाबांदी जैसे अवक्षेपण प्रकारों की सटीक पहचान करने में सक्षम है।
    • बेहतर अनुमान: यह वर्षा के सटीक अनुमान और गंभीर मौसम की घटनाओं का बेहतर पता लगाने में मदद करता है, जबकि गलत संकेतों (false signals) को कम करता है। 

नई सेवाएँ: ‘नाउकास्ट’ (Nowcast)

डॉ. सिंह ने ‘नाउकास्ट’ सेवाओं की शुरुआत पर भी प्रकाश डाला।विशेषता: यह अगले तीन घंटों के लिए अत्यधिक स्थानीयकृत और सटीक पूर्वानुमान प्रदान करता है।

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