मध्य प्रदेश राज्य अभिलेखागार में तात्या टोपे का 169 वर्ष पुराना दुर्लभ पत्र मिला

स्वतंत्रता सेनानी तात्या टोपे द्वारा हस्ताक्षरित 1857 का एक दुर्लभ हस्तलिखित पत्र मध्य प्रदेश राज्य अभिलेखागार में मिला है। केंद्र के ज्ञान भारत मिशन डिजिटलीकरण परियोजना के दौरान खोजा गया यह पत्र प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से पहले की गई सूक्ष्म योजना पर नई रोशनी डालता है।

तात्या टोपे का दुर्लभ पत्र: मुख्य अंश

  • खोज: यह जर्जर दस्तावेज मध्य प्रदेश के पुरातत्व निदेशालय के पुराने रिकॉर्ड से बरामद किया गया है। विशेषज्ञों ने दस्तावेज़ पर तात्या टोपे के हस्ताक्षर की प्रामाणिकता की पुष्टि की है।
  • सम्बोधन: यह पत्र सूबेदारों, सरदारों, सिपाहियों और हवलदारों को संबोधित है, जो रियासतों के बीच एक समन्वित नेटवर्क बनाने के तात्या टोपे के प्रयासों को दर्शाता है।
  • भाषा और लिपि: यह पत्र मराठमोली लिपि का उपयोग करके बुंदेली/हिंदी में लिखा गया है।
  • ऐतिहासिक संदर्भ: पत्र पर ‘चैत्र बदी 7, संवत 1914’ (1857 के अनुरूप) की तारीख अंकित है। इसमें तात्या टोपे ने सैन्य नेताओं से चरखारी के राजा से प्राप्त एक प्रस्ताव पर इकट्ठा होने और विचार-विमर्श करने का आग्रह किया था। 

पत्र की महत्वपूर्ण पंक्ति:

“तात्या साहेब बहादुर के आदेशानुसार… सभी सिपाहियों और सरदारों को इकट्ठा होकर विचार-विमर्श करना चाहिए। जो कुछ भी सभी के द्वारा सर्वसम्मति से तय किया जाएगा, वह हमें स्वीकार्य होगा।”

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