सुप्रीम कोर्ट ने यमुना नदी की सफाई के लिए उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया
यमुना नदी, जो दिल्ली सहित 57 मिलियन (5.7 करोड़) से अधिक लोगों के लिए जीवन रेखा मानी जाती है, को साफ करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है, जिसमें उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव शामिल होंगे जिनसे होकर यमुना नदी बहती है। समिति को आठ सप्ताह के भीतर नदी की सफाई के लिए एक विस्तृत और व्यापक योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
यमुना नदी: एक संक्षिप्त परिचय
- ऐतिहासिक संदर्भ: माना जाता है कि प्राचीन काल में यमुना ‘घग्गर’ नदी (जिसे वेदों में सरस्वती नदी माना गया है) की एक सहायक नदी थी। बाद में टेक्टोनिक हलचलों के कारण इसने अपना रास्ता पूर्व की ओर बदल लिया और यह गंगा की मुख्य सहायक नदी बन गई।
- उद्गम: यह उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में ‘मूसूरी रेंज’ की ‘बंदरपूँछ’ चोटियों के पास यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती है। यहाँ इसकी ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 6,387 मीटर है।
- लंबाई और संगम: यमुना कुल 1,376 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में ‘संगम’ स्थल पर गंगा नदी में मिल जाती है।
- महत्वपूर्ण तथ्य: यह भारत की सबसे लंबी ऐसी नदी है जो सीधे समुद्र में नहीं गिरती।
- प्रवाह क्षेत्र: यह नदी उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश से होकर गुजरती है।
सहायक नदियाँ:
- हिमालयी क्षेत्र में: ऋषि गंगा, हनुमान गंगा, टोंस और गिरी। (इनमें ‘टोंस’ सबसे बड़ी सहायक नदी है, जो यमुना के कुल जल प्रवाह में लगभग 60% योगदान देती है)।
- मैदानी क्षेत्र में: हिंडन, चंबल, सिंध, बेतवा और केन।


