सुप्रीम कोर्ट ने ‘पागल कुत्तों’ को यूथेनेशिया की अनुमति दी
19 मई, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने 7 नवंबर, 2025 के आदेश में संशोधन करने से इनकार कर दिया। इस आदेश में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया गया था कि वे शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, बस डिपो और रेलवे स्टेशनों सहित अधिक भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाना सुनिश्चित करें। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि टीकाकरण और नसबंदी के बाद भी इन कुत्तों को वापस उन्हीं संस्थागत क्षेत्रों में “नहीं छोड़ा” जा सकता है।
न्यायालय ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि पशु जन्म नियंत्रण (ABC) ढांचे के वर्षों से कमजोर क्रियान्वयन के कारण देश में आवारा कुत्तों का संकट चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। इस मुद्दे को सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 21 से जोड़ते हुए, अदालत ने कहा कि जीवन के अधिकार (राइट टू लाइफ) में बिना किसी हमले के डर के सार्वजनिक स्थानों पर स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार शामिल है। अदालत ने टिप्पणी की, “संविधान ऐसे समाज की कल्पना नहीं करता है जहां बच्चे और बुजुर्ग नागरिक अपनी शारीरिक शक्ति या भाग्य भरोसे जीवित रहने के लिए छोड़ दिए जाएं।”
न्यायालय के प्रमुख निर्देश:
- ABC केंद्र: देश के प्रत्येक जिले में कम से कम एक पूर्णतः सक्रिय ABC केंद्र स्थापित किया जाए। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को घनत्व और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर बुनियादी ढांचे का विस्तार करने को कहा गया है।
- चिकित्सा सुविधाएं: अधिकारियों को एंटी-रेबीज दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और पशु चिकित्सा एवं टीकाकरण सेवाओं में सुधार करने का आदेश दिया गया है।
- राजमार्गों के लिए समन्वय: NHAI और राज्यों को राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर आवारा जानवरों से निपटने के लिए एक समन्वित तंत्र बनाने का निर्देश दिया गया है, जिसमें परिवहन वाहन, आश्रय सुविधाएं और पशु कल्याण संगठनों के साथ समन्वय शामिल है।
- इच्छामृत्यु (यूथेनेशिया): न्यायालय ने माना कि प्राधिकरण कानूनी रूप से अनुमेय उपाय अपना सकते हैं, जिसमें उन कुत्तों के मामले में यूथेनेशिया (दया मृत्यु) भी शामिल है जो रेबीज से ग्रस्त हैं, लाइलाज बीमारी से पीड़ित हैं, या खतरनाक और आक्रामक हैं और मानव जीवन के लिए खतरा पैदा करते हैं। यह कार्रवाई ‘पशु क्रूरता निवारण अधिनियम’ और ‘ABC नियमों’ के अनुसार सख्ती से की जानी चाहिए।
- निगरानी: सभी उच्च न्यायालयों को इन निर्देशों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए निरंतर कार्यवाही दर्ज करने का निर्देश दिया गया है।
पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023
पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत जारी किए गए हैं। ये नियम आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण को प्राथमिक तरीका मानते हैं। ये नियम कुत्तों के अपने इलाके पर अधिकार के स्वभाव को पहचानते हुए उन्हें नसबंदी के बाद उसी इलाके में वापस छोड़ने की आवश्यकता रखते हैं। ये नियम कुत्तों को अंधाधुंध मारने या स्थानांतरित करने की अनुमति नहीं देते हैं। यूथेनेशिया केवल उन सीमित स्थितियों में अनुमत है जिनमें जानवर रेबीज से ग्रस्त, लाइलाज बीमारी से पीड़ित या गंभीर रूप से घायल हों।
संवैधानिक पहलूयह मामला संवैधानिक चिंताएं भी उठाता है। पशु कल्याण समूहों ने अनुच्छेद 51A(g) का सहारा लिया, जो नागरिकों से जीवित प्राणियों के प्रति करुणा दिखाने के लिए कहता है। वहीं, निवासियों और कुत्ता काटने के पीड़ितों का प्रतिनिधित्व करने वाले याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि अनियंत्रित आवारा कुत्तों की आबादी नागरिकों के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत अधिकारों को प्रभावित करती है, जिसमें स्वतंत्र रूप से घूमने और सुरक्षित रूप से रहने का अधिकार शामिल है।


