चंद्रयान-3: विक्रम लैंडर का ‘हॉप’ प्रयोग और लूनर रेगोलिथ का अध्ययन

चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर 23 अगस्त, 2023 को चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतरा था। चंद्रमा की सतह पर लगभग 10 पृथ्वी-दिवसों तक प्रयोग करने, निकट-सतह प्लाज्मा और जमीनी कंपनों का अध्ययन करने के बाद, 2 सितंबर 2023 को विक्रम लैंडर ने शेष ईंधन का उपयोग करके एक “हॉप” (लगभग 50 सेमी की छलांग) का प्रदर्शन किया। यह ‘हॉप’ भविष्य के उन मिशनों के लिए एक महत्वपूर्ण कौशल साबित हुआ जो चंद्रमा के नमूनों को वापस पृथ्वी पर लाएंगे।

लूनर रेगोलिथ (Lunar Regolith): वैज्ञानिक रूप से, जिसे हम अक्सर ‘चंद्र मृदा’ कहते हैं, उसके लिए अधिक उपयुक्त शब्द ‘लूनर रेगोलिथ’ है। लूनर रेगोलिथ वास्तव में ‘टूटी हुई चट्टानें’ हैं—जो छोटे, नुकीले कांच जैसे टुकड़ों से बनी हैं। ये अत्यधिक घर्षणकारी (abrasive) होती हैं और स्थिर बिजली (static electricity) की तरह हर चीज से चिपक जाती हैं।

वैज्ञानिक और तकनीकी, दोनों दृष्टियों से लूनर रेगोलिथ के तापीय और भौतिक (सामूहिक रूप से ‘थर्मोफिजिकल’) गुणों को समझना महत्वपूर्ण है। ‘थर्मोफिजिकल विशेषताएं’ इस सवाल का सुराग देती हैं कि चंद्रमा सौर ताप इनपुट का प्रबंधन कैसे करता है; यह कितना अवशोषित करता है और कितना वापस अंतरिक्ष में विकीर्ण करता है?

ChaSTE प्रयोग: चंद्रमा पर ‘चंद्र सरफेस थर्मोफिजिकल एक्सपेरिमेंट’ (ChaSTE) ने ठीक यही काम किया। ChaSTE एक नुकीले सिरे वाला, छड़ी के आकार का प्रोब (जांच यंत्र) था, जिसमें इसकी लंबाई के साथ तापमान सेंसर लगे थे और सिरे पर एक हीटर लगा था। इसे विक्रम लैंडर पर लूनर रेगोलिथ में प्रवेश करने के लिए लगाया गया था।हॉप (Hop) का महत्व: विक्रम लैंडर के ‘हॉप’ प्रयोग ने ChaSTE को एक अलग स्थान का विश्लेषण करने की अनुमति दी, जिससे यह देखा जा सका कि इंजन की लपटों (plume) ने चंद्र सतह को कैसे प्रभावित किया। इस प्रयोग ने चंद्रमा के ‘ट्वाइलाइट’ (गोधूलि) काल के दौरान भी महत्वपूर्ण माप प्राप्त करने में मदद की।

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