सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत ‘एसिड अटैक पीड़ित’ की परिभाषा का विस्तार किया
सुप्रीम कोर्ट ने 4 मई को यह निर्णय दिया कि एसिड हमले से बचे वे लोग, जिन्हें जबरन एसिड पिलाया गया और जिनके शरीर पर कोई बाहरी निशान (Scarring) नहीं है, लेकिन आंतरिक चोटें आई हैं, उन्हें भी ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम’ (RPwD Act), 2016 के तहत पीड़ित माना जाएगा।
- पूर्वव्यापी प्रभाव (Retrospective Effect): यह स्पष्टीकरण उस दिन से लागू होगा जब से यह अधिनियम अस्तित्व में आया है।
- दोष का बोझ (Burden of Proof): न्यायालय ने सरकार को सुझाव दिया है कि दोष साबित करने का बोझ आरोपी पर डाला जाना चाहिए और एसिड बेचने वालों को भी ऐसे मामलों में ‘सह-अभियुक्त’ (Co-accused) बनाया जाना चाहिए।
RPwD अधिनियम, 2016 में परिभाषा का विस्तार
अधिनियम की अनुसूची 2(zc) में पहले की परिभाषा सीमित थी। इसके अनुसार एसिड अटैक पीड़ित केवल वही व्यक्ति था जो “एसिड फेंकने के कारण विरूपित (Disfigured)” हुआ हो।
बदलाव की आवश्यकता क्यों थी?
- प्रमाणपत्र की अनिवार्यता: RPwD अधिनियम के तहत मिलने वाला दिव्यांगता प्रमाणपत्र (Disability Certificate) वित्तीय सहायता, पुनर्वास योजनाओं और चिकित्सा सहायता के लिए ‘प्रवेश द्वार’ की तरह है।
- सुविधाओं तक पहुंच: इस स्पष्टीकरण के बिना, आंतरिक चोटों वाले पीड़ितों को सरकारी योजनाओं और मुफ्त चिकित्सा का लाभ नहीं मिल पा रहा था।
RPwD अधिनियम, 2016 के मुख्य प्रावधान
यह अधिनियम 19 अप्रैल, 2017 को लागू हुआ, जिसने 1995 के पुराने कानून का स्थान लिया।
- 21 श्रेणियां: इसमें दिव्यांगता की श्रेणियों को 7 से बढ़ाकर 21 कर दिया गया है।
- आरक्षण: शिक्षा और सरकारी नौकरियों में दिव्यांग जनों के लिए आरक्षण का प्रावधान है।
- निःशुल्क शिक्षा: ‘बेंचमार्क दिव्यांगता’ वाले 6 से 18 वर्ष के प्रत्येक बच्चे को मुफ्त शिक्षा का अधिकार है।
- अंतरराष्ट्रीय मानक: यह कानून भारत को UNCRPD (दिव्यांग जनों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन) के अनुरूप बनाता है। भारत इस कन्वेंशन का हस्ताक्षरी राष्ट्र है।
न्यायालय की चिंता और सुझाव
न्यायालय ने कहा कि एसिड हमलों के लिए मौजूदा सजा एक ‘निवारक’ (Deterrent) के रूप में विफल रही है। इसलिए, सख्त कानूनी प्रावधानों और एसिड की बिक्री पर कड़े नियंत्रण की आवश्यकता है।
यह निर्णय न केवल पीड़ितों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने में मदद करेगा, बल्कि उन्हें वह सम्मान और सहायता भी दिलाएगा जिसके वे हकदार हैं।


