बस्तर पंडुम 2026
हाल ही में छत्तीसगढ़ के बस्तर मंडल के एक प्रतिनिधिमंडल ने, जिसमें बस्तर पंडुम 2026 के विजेता, परगना मांझी और चालकी तथा पद्म पुरस्कार से सम्मानित व्यक्तित्व शामिल थे, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में मुलाकात की।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि बस्तर की गौरवशाली परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान का उत्सव है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बस्तर की वास्तविक पहचान को स्थापित करना है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि बस्तर पंडुम ने क्षेत्र की जनजातीय परंपराओं और लोक कलाओं को देश और विदेश में व्यापक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने रेखांकित किया कि बस्तर पंडुम जैसे आयोजन युवाओं को उनकी परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत से दोबारा जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे आयोजन पर्यटन को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर पैदा करने में भी सहायक होते हैं।
बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ने बस्तर की जनजातीय परंपराओं, लोक कलाओं, मांझी-चालकी व्यवस्था और बस्तर पंडुम उत्सव के बारे में जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति को झिटकू-मिटकी पर आधारित एक कलाकृति भेंट की। यह बस्तर की लगभग 300 वर्ष पुरानी लोककथा मानी जाती है।
स्थानीय परंपरा के अनुसार, झिटकू-मिटकी की कथा प्रेम, त्याग और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। बस्तर क्षेत्र के कुछ हिस्सों में इन दोनों पात्रों को खोड़िया राजा और गप्पा देई के रूप में श्रद्धा के साथ स्मरण किया जाता है।
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