प्लैनेटरी रिंग्स ऑटोनॉमस एक्सप्लोरेशन विद इन-सिटू सैंपलिंग (PRAXIS)
नासा ने हाल ही में ‘प्रैक्सिस’ (PRAXIS) नामक एक मिशन अवधारणा का चयन इनोवेटिव एडवांस्ड कॉन्सेप्ट्स (एनआईएसी) 2026 के चरण-1 वित्तपोषण के लिए किया है। प्रैक्सिस का पूर्ण रूप ‘प्लैनेटरी रिंग्स ऑटोनॉमस एक्सप्लोरेशन विद इन-सिटू सैंपलिंग’ (Planetary Rings Autonomous EXploration with In-situ Sampling) है।
इस मिशन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मॉडल द्वारा संचालित एक जैव-प्रेरित रोबोटिक अन्वेषक शामिल होगा। यह ग्रहों के रिंग तंत्रों से सीधे कणों के नमूने लेने में सक्षम होगा। ऐसा प्रयास अब तक किसी भी अंतरिक्ष मिशन द्वारा नहीं किया गया है।
एनआईएसी के लिए इस मिशन के चयन का आधार ग्रहों के रिंग्स से जुड़े वे अनसुलझे वैज्ञानिक प्रश्न हैं, जिन्हें नासा के प्लैनेटरी साइंस डिकेडल सर्वे ने महत्वपूर्ण माना है।
मानवता ने अब तक किसी ग्रह के वलय यानी रिंग के कणों को प्रत्यक्ष रूप से छुआ नहीं है। लेकिन यदि हम इन रिंग्स के पर्याप्त निकट पहुंचकर उनके कणों के नमूने एकत्र कर सकें, तो इससे शनि के सघन वलयों, यूरेनस और नेपच्यून के विरल वलयों, सेंटॉर श्रेणी के चारिक्लो और चिरॉन जैसे अन्य पिंडों के वलयों तथा यहां तक कि प्रारंभिक प्रोटो-प्लैनेटरी और परितारकीय डिस्क की संरचना एवं उत्पत्ति को समझने में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है।
प्रैक्सिस का उद्देश्य मिलीमीटर से सेंटीमीटर आकार के वलय कणों का पहला प्रत्यक्ष अवलोकन उपलब्ध कराकर डिकेडल सर्वे की एक प्रमुख प्राथमिकता को पूरा करना है।
ग्रहों के वलय अत्यधिक गतिशील वातावरण होते हैं, जहां कणों की निरंतर गति के कारण टकराव से बचने, सटीक नमूना संग्रह और यथास्थान विश्लेषण के लिए उन्नत रोबोटिक स्वायत्तता की आवश्यकता होती है।
प्रैक्सिस एक नई कृत्रिम बुद्धिमत्ता-संचालित, जैव-प्रेरित रोबोटिक अन्वेषण प्रणाली का विकास और परीक्षण करेगा, जो वलयों से यथास्थान नमूने एकत्र करने में सक्षम होगी। यह ऐसी क्षमता होगी जिसका अब तक किसी मिशन में प्रयास नहीं किया गया है।
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