भारत ने UNCITRAL की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर  अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी की

भारत ने संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून आयोग (United Nations Commission on International Trade Law: UNCITRAL) की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी की।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि तकनीकी प्रगति, डिजिटल वाणिज्य, बदलती आपूर्ति श्रृंखलाओं और निवेश के नए स्वरूपों के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में गहरा परिवर्तन हो रहा है। ऐसे में यूएनसीआईटीआरएएल की भूमिका पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गई है।

उन्होंने वैश्विक व्यापार को समर्थन देने के लिए पूर्वानुमेय और सामंजस्यपूर्ण कानूनी ढांचे की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून का विकास वैश्विक दक्षिण की विकास संबंधी प्राथमिकताओं को प्रतिबिंबित करने वाला होना चाहिए।

UNCITRAL के बारे में

संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून आयोग (UNCITRAL) की स्थापना वर्ष 1966 में हुई थी। यह संयुक्त राष्ट्र महासभा का एक सहायक निकाय है, जिसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून के क्रमिक सामंजस्य और एकीकरण को बढ़ावा देना है।

UNCITRAL की स्थापना वर्ष 1966 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा की गई थी। विचार-विमर्श को अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसकी सदस्यता सीमित संख्या में देशों तक रखी गई है।

UNCITRAL में प्रारंभ में 29 सदस्य देश थे। वर्ष 1973 में इसकी सदस्य संख्या बढ़ाकर 36, वर्ष 2004 में 60 और वर्ष 2022 में बढ़ाकर 70 सदस्य कर दी गई।

भारत UNCITRAL का संस्थापक सदस्य है। वास्तव में, भारत उन आठ देशों में से एक है, जो UNCITRAL के लगातार सदस्य रहे हैं।

आयोग अपना कार्य वार्षिक सत्रों के माध्यम से करता है। ये सत्र बारी-बारी से न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय और वियना स्थित वियना अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित किए जाते हैं।

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