राष्ट्रीय कैम्पा के शासकीय निकाय की बैठक में ‘आस्था वन संरक्षण योजना’ को मंजूरी दी गई
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में 10 जुलाई को सीएएसएफओएस (CASFOS), कोयंबटूर में राष्ट्रीय कैम्पा (National CAMPA) के शासकीय निकाय (Governing Body) की सातवीं बैठक आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में राष्ट्रीय कैम्पा के समग्र प्रदर्शन की समीक्षा की गई। साथ ही देश भर में प्रतिपूरक वनीकरण, वन संरक्षण और वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने के उद्देश्य से कई नए प्रस्तावों और पहलों पर विचार किया गया।
शासकीय निकाय ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किए गए नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) और प्रतिपूरक वनीकरण (CA) गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा की। इसके साथ ही इस अवधि में कैम्पा फंड की प्राप्ति, स्वीकृति और हस्तांतरण की स्थिति का भी जायजा लिया गया।
डिजिटल गवर्नेंस पहलों की प्रशंसा
राष्ट्रीय कैम्पा की प्रमुख डिजिटल गवर्नेंस पहलों की समीक्षा करते हुए शासकीय निकाय ने वित्तीय वर्ष 2026-27 चक्र के लिए ‘डिजिटल वार्षिक कार्य योजना’ (Digital APO) के संचालन की सराहना की। इसके तहत अब राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अपनी वार्षिक कार्य योजनाएं डिजिटल रूप से तैयार और जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, एफएओ-इंडिया (FAO-India) के परामर्श से विकसित किए गए ‘हरित-संकल्प पोर्टल’ (Harit-SANKALP – System for Accreditation, Nursery Knowledge for Afforestation Linkage Platform) की प्रगति को भी बैठक में प्रस्तुत किया गया।
वनीकरण और पर्यावरण योजनाओं की प्रगति
बैठक में जानकारी दी गई कि ‘नगर वन योजना’ के तहत 571.50 करोड़ रुपये जारी कर 652 नगर वनों/वाटिकाओं को विकसित किया जा चुका है। वहीं, वृक्षारोपण आधारित हरित आवरण विस्तार को बढ़ावा देने के लिए ‘ग्रीन क्रेडिट योजना’ के तहत आईसीएफआरई (ICFRE) को 7.28 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
‘आस्था वन संरक्षण योजना’ को मंजूरी
इस बैठक में एक बड़ी घोषणा करते हुए ‘आस्था वन संरक्षण योजना’ को मंजूरी दी गई। इस नई योजना के लिए पांच वर्षों (2026–27 से 2030–31) की अवधि के लिए 3,000 करोड़ रुपये का प्रारंभिक कोष (Corpus) रखा गया है। इसके तहत देश भर में लगभग 15,000 आस्था वनों (Sacred Groves) का संरक्षण और पुनरुद्धार किया जाएगा। इसके साथ ही, भू-क्षरण (Land Degradation) और जैव विविधता के नुकसान से निपटने व लैंडस्केप बहाली के लिए एक नई योजना को भी मंजूरी दी गई, जिसे राष्ट्रीय कोष (National Fund) से सहायता प्रदान की जाएगी।
क्या है कैम्पा (CAMPA) और सीएएफ (CAF) अधिनियम?
- वैधानिक ढांचा: प्रतिपूरक वनीकरण निधि (CAF) अधिनियम, 2016 में लागू किया गया था और इसके नियम 10 अगस्त 2018 को अधिसूचित किए गए। यह अधिनियम और नियम 30 सितंबर 2018 से प्रभावी रूप से लागू हैं।
- फंड की व्यवस्था: अधिनियम के प्रावधानों के तहत लोक लेखा (Public Account) के अंतर्गत दो विशेष ब्याज वाली निधि स्थापित की गई हैं—’राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि’ (केंद्रीय स्तर पर) और 33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में ‘राज्य प्रतिपूरक वनीकरण निधि’। ये निधियां गैर-व्यपगत (Non-lapsable) हैं, यानी इनका पैसा लैप्स नहीं होता और इस पर केंद्र सरकार द्वारा घोषित दर से प्रतिवर्ष ब्याज मिलता है।
- प्रबंधन: इस अधिनियम ने केंद्र में तदर्थ (Ad-hoc) कैम्पा के स्थान पर ‘राष्ट्रीय कैम्पा’ (राष्ट्रीय प्राधिकरण) और राज्यों में ‘राज्य प्राधिकरणों’ की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। राष्ट्रीय निधि केंद्र सरकार के नियंत्रण में है, जबकि राज्य निधि संबंधित राज्य सरकारों के प्रबंधन में कार्य करती है।
- मुख्य उद्देश्य: इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य गैर-वन कार्यों के लिए वनों के डायवर्जन (Forest Diversion) के कारण होने वाले पारिस्थितिकी तंत्र और वन भूमि के नुकसान की भरपाई करना है। यह प्रतिपूरक वनीकरण, क्षयित वनों के पुनरुद्धार, वन्यजीव पर्यावासों में सुधार और जैव विविधता को समृद्ध करके किया जाता है। राष्ट्रीय कैम्पा, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है, जिसे इस फंड के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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