काजीरंगा में पहली बार येलो थ्रोटेड मार्टेन प्रजाति देखी गई
काजीरंगा नेशनल पार्क और टाइगर रिज़र्व, जो कि 1,302 वर्ग किलोमीटर में फैला यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल है, में पहली बार एक ऐसे छोटे शिकारी को देखा गया है जो अपने वजन से कहीं अधिक ताकतवर शिकारियों से लड़ने के लिए जाना जाता है। असम वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में काजीरंगा टाइगर सेल द्वारा नियमित कैमरा ट्रैपिंग के दौरान पीले गले वाले मार्टेन/येलो थ्रोटेड मार्टेन (Martes flavigula) की तस्वीर ली गई, जिससे पार्क के अर्ध-सदाबहार (semi-evergreen) वन क्षेत्रों में इस मेसोप्रेडेटर (mesopredator) की उपस्थिति की पुष्टि हुई है।
येलो थ्रोटेड मार्टेन (Martes flavigula) दक्षिण-पूर्व एशिया के घने जंगलों में पाया जाने वाला एक बेहद सुंदर और दुर्लभ मांसाहारी जीव है। अपने जीवंत सुनहरे-पीले गले और सुडौल, लंबे शरीर के कारण पहचाने जाने वाला यह फुर्तीला शिकारी अपने पारितंत्र के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
येलो थ्रोटेड मार्टेन के बारे में
पीले गले वाला मार्टेन (Martes flavigula) ‘मुस्टेलिडे’ (Mustelidae) परिवार का सदस्य है, जिसमें बेजर, नेवले और ऊदबिलाव (badgers, weasels, otters, ferrets, and martens) जैसे अन्य छोटे मांसाहारी जीव शामिल हैं। यह इस परिवार की अन्य प्रजातियों से आसानी से अलग पहचाना जा सकता है, क्योंकि इसके गर्दन वाले क्षेत्र में चमकदार सुनहरे-पीले रंग के फर होते हैं जो नीचे की पीठ की ओर धीरे-धीरे पीले-भूरे रंग में बदल जाते हैं, साथ ही इसकी पूंछ भी काफी लंबी होती है (जो इसके शरीर की लंबाई की दो-तिहाई होती है)।
एशिया में पीले गले वाले मार्टेन की नौ उप-प्रजातियां पाई जाती हैं। यह हिमालय के पार, पश्चिम में अफगानिस्तान से लेकर पूर्व में म्यांमार तक, और नीचे दक्षिण-पूर्व एशिया होते हुए मलेशिया और इंडोनेशिया तक पाया जाता है। पीले गले वाला मार्टेन सभी मार्टेन प्रजातियों में सबसे बड़ा है और अपनी बुद्धिमत्ता और कुशलता के लिए जाना जाता है।


