भारत ने चावल पर सब्सिडी देने हेतु सातवीं बार WTO के ‘पीस क्लॉज़’ का सहारा लिया
विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के तहत चावल उत्पादकों को दी जाने वाली सब्सिडी की 10% की सीमा को पार करने के कारण भारत ने 7वीं बार ‘पीस क्लॉज’ (Peace Clause) का सहारा लिया है।
मुख्य घटनाक्रम (29 अप्रैल 2026)
- सब्सिडी का विवरण: भारत ने WTO को सूचित किया कि उसने 2024-25 में चावल किसानों को 7.6 बिलियन डॉलर की सब्सिडी दी है।
- सीमा उल्लंघन: यह सब्सिडी कुल उत्पादन मूल्य (64.13 बिलियन डॉलर) का लगभग 11.85% थी, जो निर्धारित 10% की सीमा (De minimis level) से अधिक है।
- इतिहास: भारत ने पहली बार 2020 में इस क्लॉज का उपयोग किया था और ऐसा करने वाला वह दुनिया का पहला देश बना था।
विश्व व्यापार संगठन (WTO) ‘पीस क्लॉज’ क्या है?
‘पीस क्लॉज’ एक सुरक्षा तंत्र (Safety Mechanism) है जिसे 2013 के बाली मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में अपनाया गया था और 2014 में इसे और मजबूत किया गया।
- उद्देश्य: यह विकासशील देशों को खाद्य सुरक्षा उद्देश्यों के लिए सब्सिडी की सीमा (उत्पादन मूल्य का 10%) पार करने की अनुमति देता है।
- कानूनी सुरक्षा: यह क्लॉज भारत जैसे विकासशील देशों के खाद्य खरीद कार्यक्रमों (जैसे MSP) को अन्य WTO सदस्यों द्वारा कानूनी चुनौती दिए जाने से बचाता है।
- शर्तें:
- यह केवल उन सार्वजनिक स्टॉकहोल्डिंग कार्यक्रमों पर लागू होता है जो बाली निर्णय की तारीख तक अस्तित्व में थे।
- सब्सिडी से वैश्विक व्यापार में विकृति (distortion) नहीं होनी चाहिए।
महत्व (Significance)
भारत के अनुसार, चावल के लिए ‘डी मिनिमिस’ (De minimis) स्तर का उल्लंघन केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक स्टॉकहोल्डिंग कार्यक्रमों के कारण हुआ है। यह क्लॉज सुनिश्चित करता है कि भारत जैसे देश अपने गरीब नागरिकों की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आजीविका की रक्षा बिना किसी अंतरराष्ट्रीय कानूनी बाधा के कर सकें।


