जोधपुर मोजड़ी को GI टैग मिला
केंद्र सरकार ने जोधपुर की लगभग 200 साल पुरानी मोजड़ी शिल्प को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया है, जिससे इस पारंपरिक फुटवियर को आधिकारिक पहचान मिली है और इसके वैश्विक ब्रांडिंग को बढ़ावा मिला है। जीआई रजिस्ट्री (GI Registry) ने जोधपुर हस्तशिल्प निर्यातक संघ (Jodhpur Handicraft Exporters Association) और ग्राम विकास सेवा संस्थान को यह जीआई प्रमाणपत्र सौंपा।
यह मान्यता जोधपुर के हस्तशिल्प उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। जोधपुरी मोजड़ी का निर्माण ‘जीनगर’ नामक जाति के लोगों द्वारा किया जाता है, जो शोधकर्ताओं के अनुसार, पारंपरिक रूप से जीन (घोड़े की काठी) बनाने वाले थे। कभी राजघरानों द्वारा संरक्षण प्राप्त करने वाली यह मोजड़ी धीरे-धीरे एक विशिष्ट शिल्प के रूप में विकसित हुई, जिसने शहर को एक अनूठी पहचान दी है।
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