गुजरात के गिर जंगलों ने इंडियन ग्रे हॉर्नबिल की वापसी
गुजरात के गिर जंगलों ने इंडियन ग्रे हॉर्नबिल (Indian Grey Hornbill) के सफल पुनरुत्थान और प्रजनन के साथ संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता दर्ज की है। यह एक ऐसी प्रजाति है जो छह दशक से भी पहले इस क्षेत्र से विलुप्त हो गई थी। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, एक वैज्ञानिक अध्ययन ने पुष्टि की है कि प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम (species recovery programme) के तहत छोड़े गए ग्रे हॉर्नबिल न केवल जंगल में जीवित रहे हैं, बल्कि उन्होंने अपने क्षेत्र स्थापित कर लिए हैं और चूजों को जन्म भी दिया है। गुजरात वन विभाग और संरक्षण सहयोगियों के नेतृत्व में की गई यह पुनरुत्थान पहल, गिर के परिदृश्य में स्थानीय रूप से विलुप्त प्रजातियों को बहाल करने के प्रयासों का पहला व्यापक मूल्यांकन है। इंडियन ग्रे हॉर्नबिल लंबी दूरी तक बीजों को फैलाने वाले जीव के रूप में एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक भूमिका निभाता है, जो बड़े क्षेत्रों में फलदार वृक्षों के बीजों को पहुँचाकर जंगलों को पुनर्जीवित करने में मदद करता है।
यह निष्कर्ष ऐसे समय में आए हैं जब गुजरात ने हाल ही में वन्यजीव संरक्षण में एक और उपलब्धि दर्ज की है, जहाँ “जंप-स्टार्ट” तकनीक के माध्यम से पैदा हुआ दूसरा ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) का चूजा महत्वपूर्ण 40 दिनों की अवधि के बाद भी सुरक्षित जीवित है।
भारत में हॉर्नबिल की कुल नौ प्रजातियाँ पाई जाती हैं! जहाँ प्रसिद्ध ‘ग्रेट हॉर्नबिल’ पश्चिमी घाट और पूर्वोत्तर भारत में पाया जाता है, और ‘मालाबार पाइड हॉर्नबिल’ प्रायद्वीपीय जंगलों में मिलता है, वहीं ‘ इंडियन ग्रे हॉर्नबिल’ को हमारे अपने शहरों के बीचों-बीच भी देखा जा सकता है।
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