आधार वर्ष 2022-23 के साथ औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की नई श्रृंखला जारी
अप्रैल 2026 में भारत का औद्योगिक उत्पादन 4.9 प्रतिशत (साल-दर-साल) बढ़ा। यह वृद्धि मुख्य रूप से विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) गतिविधियों में तेजी के कारण हुई। यह आंकड़े ‘अखिल भारतीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक’ (Index of Industrial Production: IIP) की नई श्रृंखला के तहत जारी किए गए हैं, जिसका आधार वर्ष अब 2022-23 है।
केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने 1 जून को यह नई श्रृंखला लॉन्च की, जिसने 2011-12 के पुराने आधार वर्ष की जगह ली है। इसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था की वर्तमान संरचना को बेहतर ढंग से दर्शाना है।
नई श्रृंखला की प्रमुख विशेषताएं:
- विनिर्माण का वर्चस्व: सूचकांक में 76.06 प्रतिशत के सबसे अधिक भारांक (weight) वाले विनिर्माण क्षेत्र में 6.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो औद्योगिक विस्तार का मुख्य चालक रहा।
- व्यापक कवरेज: पहली बार IIP का दायरा खनन, विनिर्माण और बिजली से आगे बढ़कर ‘गैस आपूर्ति’ तथा ‘जल आपूर्ति, सीवरेज और अपशिष्ट प्रबंधन’ गतिविधियों तक बढ़ गया है।
- बेहतर वर्गीकरण (Granularity):
- खनन: अब ईंधन खनिजों, धात्विक खनिजों (दुर्लभ मृदा खनिजों सहित) और अधात्विक खनिजों (गौण खनिजों सहित) के लिए डेटा अलग से संकलित किया गया है।
- बिजली: नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय स्रोतों से बिजली उत्पादन को अब अलग-अलग ट्रैक किया जा रहा है।
- संशोधित वस्तु बास्केट:
- नई श्रृंखला में 463 मद समूहों में 1,042 उत्पाद शामिल हैं (पिछली श्रृंखला में 407 समूहों में 839 उत्पाद थे)।
- नया जुड़ाव: सीसीटीवी कैमरे, विमान और अंतरिक्ष यान के पुर्जे, गैर-बुने हुए वस्त्र, स्टेंट और टीके।
- बाहर किए गए: केरोसिन, फ्लोरोसेंट ट्यूब और CFL जैसी पुरानी हो चुकी वस्तुएं।
- गुणवत्ता में सुधार: मूल्य के आधार पर उत्पादन डेटा एकत्र करने वाले मद समूहों की संख्या 109 से बढ़कर 234 हो गई है, जिससे औद्योगिक मापन की गुणवत्ता और प्रतिनिधित्व में सुधार हुआ है।
- अद्यतन भारांक: संशोधित सूचकांक में भारांकों को ‘नेशनल अकाउंट्स स्टैटिस्टिक्स’ और 2022-23 के ‘एनुअल सर्वे ऑफ इंडस्ट्रीज’ के सकल मूल्य वर्धित (GVA) अनुमानों का उपयोग करके अपडेट किया गया है।


