स्वीडन भारत के ‘शुक्रयान’ मिशन में शामिल

स्वीडन औपचारिक रूप से भारत के महत्वाकांक्षी शुक्र मिशन ‘वीनस ऑर्बिटर मिशन’ (VOM) यान ‘शुक्रयान’ में शामिल हो गया है। यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वीडन यात्रा के दौरान की गई। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और स्वीडिश नेशनल स्पेस एजेंसी के बीच शुक्र मिशन पर सहयोग करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जो दोनों देशों के बीच ग्रहीय अन्वेषण (planetary exploration) में वैज्ञानिक सहयोग के महत्वपूर्ण विस्तार को दर्शाता है।

इस मिशन के हिस्से के रूप में, स्वीडन का ‘स्वीडिश इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस फिजिक्स’ (Swedish Institute of Space Physics) ‘वीनसियन न्यूट्रल्स एनालाइजर’ (VNA) नामक एक वैज्ञानिक उपकरण विकसित करेगा, जो भारत के शुक्र ऑर्बिटर पर भेजा जाएगा। यह उपकरण सूर्य से निकलने वाले आवेशित कणों और शुक्र के वायुमंडल के बीच होने वाली अंतःक्रिया का अध्ययन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो इस ग्रह के सबसे दिलचस्प वैज्ञानिक पहलुओं में से एक है।

मिशन का विवरण: सितंबर 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘वीनस ऑर्बिटर मिशन’ (VOM) के विकास को मंजूरी दी थी। अंतरिक्ष विभाग द्वारा संचालित होने वाला यह मिशन शुक्र ग्रह की सतह और उप-सतह, वायुमंडलीय प्रक्रियाओं और शुक्र के वातावरण पर सूर्य के प्रभाव को बेहतर ढंग से समझने के लिए एक वैज्ञानिक अंतरिक्ष यान को शुक्र की कक्षा में स्थापित करने की परिकल्पना करता है। इस मिशन के मार्च 2028 में उपलब्ध अवसर के दौरान पूरा होने की उम्मीद है।

शुक्र ग्रह के बारे में मुख्य तथ्य: शुक्र पृथ्वी का निकटतम ग्रह है और माना जाता है कि इसका निर्माण पृथ्वी के समान परिस्थितियों में हुआ था। यह इस बात को समझने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है कि ग्रहीय वातावरण बहुत अलग तरीके से कैसे विकसित हो सकते हैं।

  • विशेषताएं: शुक्र सूर्य से दूसरा ग्रह और छठा सबसे बड़ा ग्रह है। यह हमारे सौर मंडल का सबसे गर्म ग्रह है।
  • वातावरण और तापमान: शुक्र बादलों से ढका हुआ है और पृथ्वी का निकटतम पड़ोसी है। इसका वातावरण गर्मी को ‘रनवे ग्रीनहाउस इफेक्ट’ (runaway greenhouse effect) में फँसा लेता है, जिससे इसकी सतह का तापमान लेड (सीसा) को पिघलाने के लिए पर्याप्त है — जो लगभग 467 डिग्री सेल्सियस (872 डिग्री फ़ारेनहाइट) है।
  • आकार और घूर्णन: शुक्र संरचना और आकार में पृथ्वी के समान है, और इसे कभी-कभी “पृथ्वी का जुड़वां ग्रह” (Earth’s evil twin) कहा जाता है। यह अधिकांश ग्रहों के विपरीत दिशा में धीरे-धीरे घूर्णन करता है।
  • चमक: सूर्य और चंद्रमा के बाद शुक्र आकाश में तीसरा सबसे चमकीला पिंड है।

उपग्रह: शुक्र हमारे सौर मंडल के केवल दो ग्रहों में से एक है जिसका कोई चंद्रमा नहीं है। हालांकि, इसका एक ‘क्वासी-सैटेलाइट’ (quasi-satellite) है जिसे आधिकारिक तौर पर ‘ज़ूज़वे’ (Zoozve) नाम दिया गया है। क्वासी-सैटेलाइट, जिन्हें कभी-कभी ‘क्वासी-मून’ भी कहा जाता है, वे क्षुद्रग्रह (asteroids) होते हैं जो किसी ग्रह के करीब रहते हुए सूर्य की परिक्रमा करते हैं।

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