राज्यसभा में नियम 267 क्या है?
22 जुलाई, 2026 को जारी छात्र विरोध प्रदर्शनों के बीच विपक्ष ने राज्यसभा में नियम 267 के तहत एक नोटिस प्रस्तुत किया। नियम 267 राज्यसभा में कार्य संचालन तथा प्रक्रिया के नियमों का एक प्रावधान है, जो सदन की सूचीबद्ध कार्यवाही से संबंधित कुछ विशेष नियमों को स्थगित करने की अनुमति देता है।
इस नियम के अनुसार, “कोई भी सदस्य सभापति की सहमति से यह प्रस्ताव रख सकता है कि किसी नियम को उस दिन परिषद के समक्ष सूचीबद्ध कार्य से संबंधित प्रस्ताव पर लागू करने के संबंध में स्थगित किया जाए। यदि प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो संबंधित नियम को उस समय के लिए स्थगित कर दिया जाएगा। बशर्ते कि यह नियम उस स्थिति में लागू नहीं होगा, जब नियमों के किसी विशेष अध्याय में किसी नियम को स्थगित करने के लिए पहले से ही विशेष प्रावधान मौजूद हो।”
दिसंबर 2025 में राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने स्पष्ट किया था कि नियम 267 के तहत सदन में चर्चा केवल उस विषय पर हो सकती है, जो उस दिन की कार्यसूची में सूचीबद्ध हो। उन्होंने कहा था कि सूचीबद्ध कार्य के बाहर किसी मुद्दे से संबंधित कोई भी नोटिस अमान्य है।
श्री राधाकृष्णन ने कहा था कि नियम 267 के तहत लगभग प्रतिदिन ऐसे नोटिस दिए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य सूचीबद्ध कार्य को स्थगित कर सदस्यों द्वारा चुने गए मुद्दों पर चर्चा कराना है। उन्होंने जोर देकर कहा था कि नियम 267 का उद्देश्य ऐसा नहीं है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया था कि राज्यसभा में नियम 267 की तुलना लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव से नहीं की जा सकती। लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव की अनुमति संविधान के अनुच्छेद 75(3) के तहत दी जाती है, जिसके अनुसार केंद्रीय मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।



