वेनेजुएला में “डब्लेट” भूकंप!
यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार, वेनेजुएला में 24 जून को आया भूकंप कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि यह एक दुर्लभ घटना है जिसे “डब्लेट” (Doublet) कहा जाता है।
- मुख्य अंतर: एक सामान्य भूकंप में एक बड़ा मुख्य झटका (Mainshock) आता है और उसके बाद छोटे-छोटे झटके (Aftershocks) आते हैं जिनकी ऊर्जा बहुत कम होती है। लेकिन डब्लेट में लगभग समान तीव्रता और ऊर्जा वाले दो बड़े भूकंप बेहद कम समय के अंतराल पर एक ही क्षेत्र में आते हैं।
- वेनेजुएला का मामला: यहाँ पहले 7.2 तीव्रता का भूकंप आया और उसके ठीक 39 सेकंड बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा और भी शक्तिशाली झटका लगा। दोनों भूकंप कम गहराई (Shallow depth) पर आए, जिसके कारण विनाश की तीव्रता और मौत का आंकड़ा (235 से अधिक) इतना भयावह हो गया।
- टेक्टोनिक कारण: यह विनाशकारी हलचल कैरेबियाई प्लेट (Caribbean plate) और दक्षिण अमेरिकी प्लेट (South American plate) की सीमाओं पर हुई, जो हर साल लगभग 20 मिलीमीटर की गति से एक-दूसरे की विपरीत दिशा में खिसक (slip) रही हैं।
भूकंप और तरंगों के प्रकार
भूकंप मूल रूप से पृथ्वी का हिलना है जो ऊर्जा के अचानक मुक्त होने के कारण होता है। इस प्रक्रिया और इससे निकलने वाली तरंगों को समझना महत्वपूर्ण है:
प्रमुख शब्दावली:
- भ्रंश (Fault): भूपर्पटी (Crust) की चट्टानों में पड़ने वाली एक तीखी दरार। जब चट्टानें आपसी घर्षण (Friction) को पार कर अचानक एक-दूसरे के आगे खिसकती हैं, तो ऊर्जा मुक्त होती है।
- उद्गम केंद्र / हाइपोसेंटर (Focus/Hypocentre): पृथ्वी के भीतर का वह बिंदु जहाँ से ऊर्जा पहली बार मुक्त होती है। सभी प्राकृतिक भूकंप स्थलमंडल (Lithosphere) में ही आते हैं।
- अधिकेंद्र (Epicenter): पृथ्वी की सतह पर स्थित वह बिंदु जो उद्गम केंद्र (Focus) के ठीक ऊपर (90 डिग्री पर) होता है। सतह पर सबसे पहले भूकंपीय तरंगें यहीं पहुँचती हैं और सबसे अधिक नुकसान भी इसी क्षेत्र में होता है।
भूकंपीय तरंगों का वर्गीकरण
भूकंपीय तरंगें मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं: भूगर्भिक तरंगें (Body Waves) और धरातलीय तरंगें (Surface Waves)।
- भूगर्भिक तरंगें (Body Waves): ये उद्गम केंद्र (Focus) से ऊर्जा मुक्त होने पर उत्पन्न होती हैं और पृथ्वी के आंतरिक भाग (Body) से होकर सभी दिशाओं में आगे बढ़ती हैं। ये दो प्रकार की होती हैं:
- P-तरंगें (Primary Waves – प्राथमिक तरंगें):
- ये सबसे तीव्र गति से चलती हैं और सतह पर सबसे पहले पहुँचती हैं।
- ये ध्वनि तरंगों (Sound waves) के समान होती हैं।
- माध्यम: ये गैस, तरल और ठोस — तीनों प्रकार के पदार्थों से होकर गुजर सकती हैं।
- S-तरंगें (Secondary Waves – द्वितीयक तरंगें):
- ये P-तरंगों के कुछ समय बाद सतह पर पहुँचती हैं।
- सबसे महत्वपूर्ण विशेषता: ये तरंगें केवल ठोस पदार्थों के माध्यम से ही यात्रा कर सकती हैं, तरल या गैस में ये लुप्त हो जाती हैं। पृथ्वी के आंतरिक कोर की बनावट को समझने में इस विशेषता का बहुत बड़ा योगदान है।
- P-तरंगें (Primary Waves – प्राथमिक तरंगें):
- धरातलीय तरंगें (Surface Waves): जब भूगर्भिक तरंगें धरातल की चट्टानों (Surface rocks) से टकराती हैं, तो नई तरंगें पैदा होती हैं जिन्हें धरातलीय तरंगें कहते हैं।
- ये तरंगें केवल धरातल के साथ-साथ चलती हैं।
- तरंगों का वेग पदार्थ के घनत्व (Density) पर निर्भर करता है — माध्यम जितना सघन होगा, तरंगों की गति उतनी ही तेज़ होगी।
- नोट: धरातलीय तरंगें सिस्प्रोग्राम पर सबसे अंत में दर्ज होती हैं, लेकिन ये सबसे अधिक विनाशकारी होती हैं क्योंकि इनसे चट्टानों में विस्थापन होता है और इमारतें गिर जाती हैं।
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