द्र ने असम के मूगा रेशम के लिए ‘स्नेहजोरी’ मिशन शुरू किया

पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) ने असम के मुख्यमंत्री के साथ मिलकर “मिशन स्नेहजोरी – असम मूगा सिल्क यूएसपी” (Mission Senehjori – Assam Muga Silk USP) का शुभारंभ किया। यह एक व्यापक क्लस्टर-आधारित पहल है, जिसका उद्देश्य असम के अद्वितीय मूगा रेशम क्षेत्र को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी और उच्च-मूल्य वाले लक्जरी टेक्सटाइल इकोसिस्टम में बदलना है।

MDoNER द्वारा असम सरकार, केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय और अन्य केंद्रीय मंत्रालयों/संगठनों के साथ मिलकर संचालित यह मिशन, मूगा रेशम की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना चाहता है। इसमें होस्ट-प्लांट की खेती और रेशम के कीड़ों के बीज उत्पादन से लेकर रीलिंग, बुनाई, ब्रांडिंग, निर्यात संवर्धन, डिजिटल ट्रेसिबिलिटी और पर्यटन तक शामिल हैं।

मूगा सिल्क असम 

दुनिया के एकमात्र प्राकृतिक सुनहरे रेशम और भारत के पहले GI-टैग प्राप्त रेशम के रूप में प्रसिद्ध, मूगा सिल्क असम में लगभग 2.6 लाख बुनकर और रेंयर (कीट पालन करने वाले) परिवारों की आजीविका का साधन है। अपनी दुर्लभता और वैश्विक पहचान के बावजूद, यह क्षेत्र अभी भी काफी हद तक कम-मुद्रीकृत (under-monetised) है। ‘मिशन स्नेहजोरी’ एक प्रीमियम, ट्रेस करने योग्य और निर्यात-उन्मुख मूगा रेशम अर्थव्यवस्था बनाकर इस वैल्यू गैप को पाटने का प्रयास करता है।

यह मिशन जोरहाट, शिवसागर, लखीमपुर, धेमाजी, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, माजुली और सुआलकुची सहित प्रमुख मूगा रेशम उत्पादक जिलों को कवर करते हुए क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण अपनाता है। इस पहल में होस्ट प्लांट इकोलॉजी को मजबूत करना, आधुनिक रीलिंग बुनियादी ढांचा स्थापित करना, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को बढ़ावा देना, कॉमन फैसिलिटी सेंटर्स (CFCs) का निर्माण करना, GI प्रमाणीकरण को लागू करना और “स्नेहजोरी” ब्रांड पहचान के तहत वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाना शामिल है।असम दुनिया के कुल मूगा रेशम उत्पादन का 90 प्रतिशत हिस्सा उत्पादित करता है। इस क्षेत्र की अनूठी विशेषता — इसका प्राकृतिक सुनहरा रंग, असाधारण टिकाऊपन और GI-आधारित ट्रेसिबिलिटी — इसे विश्व स्तर पर लक्जरी वस्त्रों की श्रेणी में एक विशिष्ट स्थान प्रदान करती है।

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