उज्जैन स्थित वैश्य टेकरी बौद्ध स्तूप की फिर से खुदाई की योजना
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित वैश्य टेकरी में विशाल बौद्ध स्तूप के करीब 90 साल पुराने रहस्य को फिर से सामने लाने की तैयारी कर रहा है। माना जाता है कि यह प्राचीन स्थल 2,000 वर्ष से अधिक पुराना है और इसका संबंध मौर्य काल से है। वर्ष 1938-39 में इसकी खुदाई का प्रयास किया गया था, लेकिन गैस रिसाव के कारण मजदूर बेहोश हो गए, जिसके बाद खुदाई रोक दी गई थी।
ब्रिटिश काल की पुरातात्त्विक रिपोर्ट में इस स्तूप को उस समय का “शायद सबसे बड़ा ज्ञात” बौद्ध स्तूप बताया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, स्तूप का व्यास लगभग 350 फीट और ऊँचाई कम से कम 100 फीट थी। इसकी तुलना में, सांची का महान स्तूप लगभग 120 फीट व्यास और करीब 54 फीट ऊँचा है।
रिपोर्ट में वैश्य टेकरी के स्तूप को मौर्य काल, लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व का बताया गया है। इस आधार पर इसकी आयु लगभग 2,200 वर्ष मानी जा सकती है। यह स्थल सांची से लगभग 236 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है।
वैश्य टेकरी एक बड़े गोलाकार टीले के रूप में है, जिसके चारों ओर एक आयताकार गड्ढा मौजूद है। वर्ष 1938-39 की खुदाई में मुख्य स्तूप के कुछ हिस्से तथा दो छोटे स्तूपों के अवशेष भी सामने आए थे।
पुरातत्वविदों ने इसकी संरचना को “एक ऐसी विचित्र संरचना, जिसका कहीं और कोई उदाहरण नहीं मिलता” बताया था। अब दोबारा खुदाई होने पर इस प्राचीन बौद्ध स्थल के इतिहास और इसकी असाधारण संरचना से जुड़े कई रहस्यों के सामने आने की उम्मीद है।



