सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की कुकरैल नाइट सफारी को मंजूरी दी

सुप्रीम कोर्ट (SC) ने उत्तर प्रदेश की कुकरैल नाइट सफारी एवं डे जू परियोजना को मंजूरी दे दी है, जिससे परियोजना के समक्ष मौजूद अंतिम कानूनी बाधा समाप्त हो गई है।

इस परियोजना के तहत भारत की पहली नाइट सफारी स्थापित की जाएगी, जो सिंगापुर, थाईलैंड, चीन और इंडोनेशिया के बाद विश्व की पांचवीं नाइट सफारी होगी।

यह परियोजना लखनऊ के बाहरी क्षेत्र में स्थित 2,027 हेक्टेयर के कुकरैल रिजर्व फॉरेस्ट के भीतर ₹1,510 करोड़ की अनुमानित लागत से विकसित की जाएगी।

परियोजना को 855 एकड़ क्षेत्र में दो चरणों में विकसित किया जाएगा:

  • चरण-I: नाइट सफारी एवं इको-टूरिज्म ज़ोन।
  • चरण-II: डे जू।

नाइट सफारी में आगंतुक विशेष प्रकाश व्यवस्था (Special Lighting System) की सहायता से रात्रिचर (Nocturnal) वन्यजीवों को उनकी सक्रिय अवस्था में देख सकेंगे। यह प्रकाश व्यवस्था प्राकृतिक चाँदनी जैसी रोशनी प्रदान करेगी, जिससे वन्यजीवों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।

कुकरैल रिजर्व फॉरेस्ट, जिसका नाम गोमती नदी की सहायक नदी कुकरैल स्ट्रीम के नाम पर रखा गया है, एक महत्त्वपूर्ण शहरी वन (Urban Forest) है तथा यहाँ भारत का पहला घड़ियाल संरक्षण केंद्र (Gharial Conservation Centre) वर्ष 1975 में स्थापित किया गया था।

इस परियोजना की घोषणा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जुलाई 2022 में की थी तथा अगस्त 2022 में इसे उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल की मंजूरी प्राप्त हुई थी। चूँकि यह परियोजना एक रिजर्व फॉरेस्ट के भीतर स्थित है, इसलिए इसे सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिलने से पहले अनेक पर्यावरणीय, नियामकीय एवं न्यायिक अनुमतियों से गुजरना पड़ा।

इस परियोजना का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण, इको-टूरिज्म, पर्यावरणीय जागरूकता एवं सतत पर्यटन को बढ़ावा देना है। साथ ही कुकरैल स्ट्रीम के पुनर्जीवन (Revival) के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।

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