RBI ने वित्त वर्ष 2026 के लिए केंद्र सरकार को रिकॉर्ड 2.87 लाख करोड़ रुपये का लाभांश देने की घोषणा की

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को 2.86 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड अधिशेष (surplus) हस्तांतरण की घोषणा की है। यह निर्णय मुंबई में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय बोर्ड की 623वीं बैठक में लिया गया।

वित्तीय प्रदर्शन के मुख्य आंकड़े:

  • अधिशेष हस्तांतरण: 2.86 लाख करोड़ रुपये (केंद्र सरकार को)।
  • बैलेंस शीट: 31 मार्च, 2026 तक आरबीआई की बैलेंस शीट 20.61% बढ़कर 91.97 लाख करोड़ रुपये हो गई।
  • सकल आय: पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 26.42% की वृद्धि।
  • निवल आय: वित्त वर्ष 2026 में 3,95,972.10 करोड़ रुपये (वित्त वर्ष 2025 में 3,13,455.77 करोड़ रुपये थी)।

आकस्मिक जोखिम बफर (Contingent Risk Buffer – CRB):

आरबीआई का CRB उसके लिए एक ‘वित्तीय सुरक्षा कवच’ है, जो मुद्रा अस्थिरता, ब्याज दर के झटकों और वित्तीय संकट जैसी अप्रत्याशित चुनौतियों से निपटने में मदद करता है।

  • CRB में हस्तांतरण: बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026 के लिए CRB में 1,09,379.64 करोड़ रुपये का हस्तांतरण करने की मंजूरी दी है (पिछले वर्ष यह 44,861.70 करोड़ रुपये था)।
  • CRB का स्तर: बोर्ड ने CRB को आरबीआई की बैलेंस शीट के आकार का 6.5% बनाए रखने का निर्णय लिया है।
  • नीतिगत लचीलापन: संशोधित ‘आर्थिक पूंजी फ्रेमवर्क’ (ECF) के तहत CRB को बैलेंस शीट के 4.5% से 7.5% के बीच बनाए रखा जा सकता है।

आरबीआई का दृष्टिकोण:

आरबीआई के इस सतर्क रुख के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • भू-राजनीतिक तनाव: विशेष रूप से पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष।
  • आर्थिक जोखिम: वैश्विक ऊर्जा कीमतों में अचानक उछाल आने का खतरा।

आरबीआई अपनी यह आय घरेलू निवेश, विदेशी मुद्रा भंडार (foreign-exchange holdings) और नोट छपाई से प्राप्त होने वाले शुल्क से अर्जित करता है। वित्त वर्ष 2026 में डिविडेंड भुगतान को विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप (FX interventions) और निवेश आय से काफी मजबूती मिली।

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