खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026

प्रश्न 1. खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 क्या है?
उत्तर: संसद ने 13 अगस्त 2026 को खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया। इसका उद्देश्य खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले करों और अन्य शुल्कों की शक्ति को सीमित करना है। यह विधेयक खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act) में संशोधन करता है।

प्रश्न 2. विधेयक के तहत खनिज-युक्त भूमि के संबंध में क्या बदलाव किया गया है?
उत्तर: अब केंद्र सरकार खनिज-युक्त भूमि को भी विनियमित करेगी। ऐसी भूमि की पहचान MMDR अधिनियम के तहत केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार की जाएगी।

प्रश्न 3. नई धारा 9D क्या प्रावधान करती है?
उत्तर: नई धारा 9D के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर किसी भी नाम से कोई कर, उपकर (Cess) या अन्य शुल्क/लेवी नहीं लगाई जा सकेगी, जब तक कि केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए निर्धारित शर्तों या प्रतिबंधों के अनुसार ऐसा करना अनुमत न हो।

प्रश्न 4. किन आधारों पर लगाए जाने वाले शुल्क नई व्यवस्था के अंतर्गत आएंगे?
उत्तर: इसमें खनिज की मात्रा, खनिज के मूल्य, रॉयल्टी या किसी अन्य आधार पर लगाए जाने वाले कर, उपकर और अन्य शुल्क शामिल होंगे।

प्रश्न 5. नई व्यवस्था का क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि खनिजों से संबंधित करों और अन्य लेवी के लिए एक समान, केंद्र द्वारा निर्देशित ढाँचा लागू होगा। राज्य सरकारें केवल केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों और प्रतिबंधों के अनुसार ही ऐसी लेवी लगा सकेंगी।

प्रश्न 6. पहले से न चुकाई गई राज्य लेवी का क्या होगा?
उत्तर: संशोधन लागू होने से पहले राज्य द्वारा न लगाई गई या वसूल न की गई कोई लेवी अमान्य मानी जाएगी। हालांकि, संशोधन लागू होने से पहले जो राशि पहले ही जमा या वसूल की जा चुकी है, उसे वापस करने की बाध्यता नहीं होगी।

प्रश्न 7. MMDR अधिनियम की धारा 13 में क्या बदलाव किया गया है?
उत्तर: धारा 13 में संशोधन करके केंद्र सरकार को नियम बनाने का अधिकार दिया गया है। इन नियमों में राज्य सरकारों द्वारा ऐसी लेवी लगाने के लिए शर्तें और प्रतिबंध निर्धारित किए जाएंगे।

विधेयक की आवश्यकता क्यों पड़ी?

प्रश्न 8. मौजूदा खनन कर व्यवस्था में प्रमुख चुनौतियाँ क्या थीं?
उत्तर: संशोधन विधेयक का उद्देश्य निम्नलिखित समस्याओं का समाधान करना है:

  1. खनन क्षेत्र पर भारी कर भार
  2. खनन कार्य शुरू होने के बाद भी अचानक और अप्रत्याशित कर, उपकर एवं अन्य शुल्क लगाए जाना।
  3. खनिजों के उत्पादन या परिवहन/डिस्पैच पर कई प्रकार के कर और उपकर
  4. अलग-अलग राज्यों में करों और अन्य लेवी की अलग-अलग दरें
  5. पूर्वव्यापी प्रभाव (Retrospective Effect) से कर, उपकर या अन्य शुल्क लगाया जाना।

प्रश्न 9. इस संशोधन का व्यापक उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य खनन क्षेत्र में कर व्यवस्था को अधिक समान, पूर्वानुमानित और केंद्र द्वारा निर्धारित नियमों के अनुरूप बनाना तथा खनन कंपनियों पर पड़ने वाले अनिश्चित और अतिरिक्त कर भार को कम करना है।

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