लोकटक प्रोटोक्लस्टर-मणिपुर की लोकटक झील के नाम पर आकाशगंगा का नाम
जापान में स्थित एक भारतीय शोधकर्ता ने आकाशगंगाओं (galaxies) की एक विशाल नई खोजी गई संरचना का नाम मणिपुर की लोकटक झील के नाम पर रखा है, ताकि ब्रह्मांड में इस पूर्वोत्तर राज्य की पहचान को “अमर” किया जा सके। इस ब्रह्मांडीय संरचना का आधिकारिक नाम लोकटक प्रोटोक्लस्टर (Loktak Protocluster) रखा गया है।
यह एक आदिम (primitive) आकाशगंगा समूह है, जिसे वैज्ञानिकों ने “आकाशगंगाओं का शहर” कहा है, जो अभी भी गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से बन रहा है। इस खोज का नेतृत्व मणिपुर के खगोल भौतिकीविद् (astrophysicist) डॉ. रोनाल्डो लैशराम ने किया, जो वर्तमान में जापान के नेशनल एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी (NAOJ) में शोधकर्ता हैं। द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में प्रकाशित यह अध्ययन ब्रह्मांड के अतीत में झांकने का एक दुर्लभ अवसर प्रदान करता है।
लोकटक झील अपनी तैरती हुई वनस्पति के लिए प्रसिद्ध है, जिसे ‘फुमडी’ (phumdis) कहा जाता है, जो एक ही जल निकाय के भीतर मौजूद हैं। इसी प्रकार, इस नई खोजी गई ब्रह्मांडीय संरचना में आकाशगंगाओं के चार अलग-अलग केंद्र हैं, जो एक विशाल और विकासशील प्रणाली के हिस्से के रूप में आपस में जुड़े हुए हैं। शोध दल ने इस दूरस्थ संरचना का अध्ययन करने के लिए सुबारू टेलीस्कोप और जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) के डेटा का उपयोग किया।
अध्ययन में पाया गया कि युवा ब्रह्मांड में भी, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में स्थित आकाशगंगाएं शांत क्षेत्रों की तुलना में अलग तरह से विकसित हो रही थीं। सरल शब्दों में कहें तो, परिणाम यह बताते हैं कि एक आकाशगंगा कहाँ स्थित है, यह उसके विकास को प्रभावित कर सकता है।
लोकटक झील
मणिपुर की लोकटक झील में स्थित केबुल लामजाओ नेशनल पार्क दुनिया का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान है। यह मणिपुर के “संगाई” हिरण (डांसिंग डियर) का अंतिम प्राकृतिक पर्यावास है।


