NCERT ने कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में ‘आपातकाल’ को शामिल किया

25 जून को जारी एनसीईआरटी की नई किताब में लोकतंत्र पर आधारित अध्याय के तहत “भारत में लोकतांत्रिक प्रथाओं के समक्ष चुनौतियां” नामक एक नया खंड जोड़ा गया है, जिसमें 1975 के आपातकाल और भारतीय संविधान के आपातकालीन प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा की गई है।

1975 का राष्ट्रीय आपातकाल: एक नजर में

  • घोषणा की तिथि: 25 जून 1975
  • तत्कालीन प्रधानमंत्री: इंदिरा गांधी
  • घोषणा का आधार: “आंतरिक अशांति” (Internal Disturbance)
  • असर:
    • अधिकतर मूल अधिकारों (Fundamental Rights) निलंबित कर दिए गए।
    • प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई (प्रेस की स्वतंत्रता पर रोक)।
    • कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।
    • देश की लोकतांत्रिक संस्थाएं भारी दबाव में आ गईं और नागरिकों की स्वतंत्रता सीमित हो गई।

संविधान के आपातकालीन प्रावधान (भाग XVIII)

भारतीय संविधान के भाग 18 (Part XVIII) में तीन प्रकार की आपातकालीन स्थितियों का वर्णन है:

अनुच्छेद (Article)आपातकाल का प्रकारविवरण
अनुच्छेद 352राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency)युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के कारण यदि भारत या उसके किसी हिस्से की सुरक्षा को खतरा हो।
अनुच्छेद 356राष्ट्रपति शासन (President’s Rule)राज्यों में संवैधानिक तंत्र के विफल होने की स्थिति में लगाया जाता है।
अनुच्छेद 360वित्तीय आपातकाल (Financial Emergency)देश की वित्तीय स्थिरता या साख को खतरा होने पर (भारत में यह आज तक कभी नहीं लगा)
  • महत्वपूर्ण बदलाव (44वां संशोधन, 1978): 1975 के आपातकाल के बाद, 1978 में 44वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अनुच्छेद 352 में से “आंतरिक अशांति” शब्द को हटाकर उसकी जगह “सशस्त्र विद्रोह” (Armed Rebellion) शब्द जोड़ा गया, ताकि भविष्य में इसका दुरुपयोग न हो सके।

राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान संसद की शक्तियां

  1. लोकसभा का कार्यकाल: संसद कानून बनाकर लोकसभा के 5 वर्ष के सामान्य कार्यकाल को एक बार में 1 वर्ष के लिए बढ़ा सकती है।
  2. कानून बनाने की शक्ति: संसद को राज्य सूची (State List) के विषयों पर भी कानून बनाने का अधिकार मिल जाता है।
  3. कार्यपालिका शक्ति: केंद्र सरकार की कार्यपालिका शक्तियों का विस्तार राज्यों तक हो जाता है।

भारत में अब तक कब-कब लगा राष्ट्रीय आपातकाल?

भारत में अब तक कुल तीन बार राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया गया है:

  1. 26 अक्टूबर 1962: भारत-चीन युद्ध के समय (युद्ध के आधार पर)।
  2. 3 दिसंबर 1971: भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय (युद्ध के आधार पर)।
  3. 25 जून 1975: राजनीतिक उथल-पुथल के समय (“आंतरिक अशांति” के आधार पर)।

संसदीय स्वीकृति और समय-सीमा की प्रक्रिया

  • संसदीय स्वीकृति: आपातकाल की घोषणा को जारी होने की तारीख से 1 महीने के भीतर संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) द्वारा अनुमोदित (Approve) किया जाना अनिवार्य है।
  • विशेष परिस्थिति (लोकसभा भंग होने पर): यदि आपातकाल के समय लोकसभा भंग हो चुकी हो या 1 महीने के भीतर बिना स्वीकृति दिए भंग हो जाए, तो नई लोकसभा के पुनर्गठन के बाद उसकी पहली बैठक से 30 दिनों तक यह घोषणा प्रभावी रहेगी, बशर्ते इस दौरान राज्यसभा ने इसे मंजूरी दे दी हो।
  • अवधि: दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद आपातकाल 6 महीने तक जारी रहता है। इसे हर 6 महीने में संसद की मंजूरी लेकर अनिश्चित काल के लिए बढ़ाया जा सकता है।
  • बहुमत: आपातकाल को मंजूरी देने या उसे जारी रखने के हर प्रस्ताव को संसद के प्रत्येक सदन द्वारा विशेष बहुमत (Special Majority) से पारित किया जाना आवश्यक है।

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