NASA ने ISRO को अपने मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO को अपने ‘मून बेस’ (Moon Base) कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। यह हाल ही में शुरू किया गया एक प्रयास है, जिसका उद्देश्य मनुष्यों को फिर से चंद्रमा पर भेजना और आगे चलकर वहाँ स्थायी मानव बस्ती स्थापित करना है।
यह प्रस्ताव 5 और 6 अगस्त को बेंगलुरु में हुई भारत-अमेरिका सिविल स्पेस संयुक्त कार्य समूह (India-US Civil Space Joint Working Group) की नौवीं बैठक के दौरान दिया गया। इस बैठक को भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भी संबोधित किया।
मून बेस कार्यक्रम के तहत अंतरिक्ष यात्रियों के चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के आसपास रहकर काम करने और वैज्ञानिक अनुसंधान करने की परिकल्पना की गई है। मानवयुक्त और मानवरहित मिशनों के संयोजन के माध्यम से NASA और उसके साझेदार लंबे समय तक चंद्रमा पर गतिविधियों को संचालित करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचा विकसित करने की योजना बना रहे हैं।
वर्ष 2023 में भारत ने आर्टेमिस समझौते (Artemis Accords) में शामिल होकर इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया था। यह अमेरिका के नेतृत्व वाला अंतरिक्ष सहयोग गठबंधन है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा सहित बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण नागरिक अन्वेषण के लिए साझा सिद्धांतों का विकास और पालन करना है। भारत आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला 27वाँ देश था। अब इस समझौते में कुल 70 देश शामिल हैं।
NASA ने मनुष्यों को दोबारा चंद्रमा पर भेजने के लिए ‘आर्टेमिस कार्यक्रम’ (Artemis Programme) शुरू किया है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच सहयोग पहले की तुलना में काफी मजबूत हुआ है। इसी वर्ष, जब भारत आर्टेमिस समझौते में शामिल हुआ था, दोनों देशों ने “मानव अंतरिक्ष उड़ान सहयोग के लिए रणनीतिक ढाँचा” (Strategic Framework for Human Spaceflight Cooperation) विकसित करने पर भी सहमति जताई थी।
इसी सहयोग के तहत NASA ने भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अपनी सुविधाओं पर उन्नत प्रशिक्षण देने पर सहमति व्यक्त की थी। इसका उद्देश्य निजी कंपनियों द्वारा संचालित मिशनों के माध्यम से भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) भेजना था। 2025 में भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला का ISS तक पहुँचना इसी व्यवस्था का परिणाम था।
पिछले वर्ष दोनों अंतरिक्ष एजेंसियों ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की, जब उन्होंने लंबे समय से प्रतीक्षित NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) मिशन को लॉन्च किया। यह एक महत्वाकांक्षी और अपनी तरह का पहला संयुक्त अंतरिक्ष मिशन है।



