कोडाईकनाल सोलर ऑब्जर्वेटरी का सौर चक्र पर अध्ययन

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ एस्ट्रोफिजिक्स (IIA) के खगोलविदों की एक स्टडी में कोडाईकनाल सोलर ऑब्जर्वेटरी (अपनी 125वीं सालगिरह मनाई) से 11 साल (2015-2025) के कैल्शियम K लाइन स्पेक्ट्रोस्कोपिक डेटा का इस्तेमाल किया गया, ताकि यह मैप किया जा सके कि सूरज की चुंबकीय गतिविधि लैटीट्यूड के साथ कैसे बदलती है।  

शोध का मुख्य बिंदु: सूर्य की चुंबकीय गतिविधि

  • अध्ययन का आधार: वैज्ञानिकों ने कोडैकनाल सौर वेधशाला के पिछले 11 वर्षों (2015-2025) के ‘कैल्शियम K लाइन’ स्पेक्ट्रोस्कोपिक डेटा का उपयोग किया।
  • नई तकनीक: इस डेटा का उपयोग करके खगोलविदों ने एक नई तकनीक के जरिए यह मानचित्रण (mapping) किया कि सूर्य की चुंबकीय गतिविधि उसके अक्षांश (latitude) के साथ कैसे बदलती है।
  • महत्व: यह अध्ययन सूर्य के ‘चुंबकीय डायनेमो’ (magnetic dynamo) के संचालन को समझने में मदद करता है। यह हमें यह जानने में भी मदद करेगा कि सौर गतिविधियाँ पृथ्वी के अंतरिक्ष मौसम (space weather) और जलवायु को कैसे प्रभावित करती हैं।

सौर चक्र (Solar Cycle) को समझना

सूर्य कोई स्थिर पिंड नहीं है, बल्कि एक गतिशील और चुंबकीय रूप से सक्रिय तारा है।

  • 11-वर्षीय चक्र: सूर्य की चुंबकीय गतिविधि लगभग हर 11 साल में एक चक्र पूरा करती है। इस दौरान सूर्य के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव आपस में बदल जाते हैं (पोल फ्लिप)।
  • सौर न्यूनतम (Solar Minimum): यह चक्र की शुरुआत है, जब सूर्य पर सौर कलंकों (सनस्पॉट) की संख्या सबसे कम होती है।
  • सौर अधिकतम (Solar Maximum): यह चक्र का मध्य भाग है, जब सूर्य सबसे अधिक सक्रिय होता है और सनस्पॉट की संख्या अपने चरम पर होती है।

सौर गतिविधि और पृथ्वी पर इसका प्रभाव

सूर्य की सक्रियता सीधे तौर पर पृथ्वी के तकनीकी तंत्र को प्रभावित करती है:

  • सनस्पॉट: ये सूर्य के शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों के कारण बनते हैं।
  • विशाल विस्फोट: सौर चक्र के दौरान ‘सौर ज्वालाओं’ (solar flares) और ‘कोरोनल मास इजेक्शन’ (CME) जैसी घटनाएं बढ़ जाती हैं, जो अंतरिक्ष में ऊर्जा और पदार्थ की शक्तिशाली बौछारें भेजती हैं।
  • पृथ्वी पर प्रभाव:
    • ऑरोरा (Aurora): आसमान में सुंदर रंगीन रोशनी दिखाई देना।
    • संचार में बाधा: उपग्रह आधारित संचार (satellite communication) और रेडियो संकेतों में व्यवधान।

पावर ग्रिड: अत्यधिक तीव्र सौर तूफानों से पृथ्वी पर बिजली ग्रिड (electricity grids) भी प्रभावित हो सकते हैं।

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