जूली एली ने पक्षियों की चहचहाहट को डिकोड करने के लिए ‘कॉलर डूलिटिल चैलेंज 2026’ जीता

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफ़ोर्निया, बर्कले की अमेरिकी वैज्ञानिक डॉ. जूली एली (Dr Julie Elie) ने ज़ेबरा फिंच (एक प्रकार की छोटी चिड़िया) के आपसी संवाद (कम्युनिकेशन) के तरीकों पर किए गए शोध के लिए 100,000 डॉलर का ‘कॉलर डुलिटिल चैलेंज 2026’ पुरस्कार जीता है। डॉ. जूली एली ने ‘कॉलर डुलिटिल चैलेंज फॉर टू-वे इंटरस्पेशीज कम्युनिकेशन’ (दोतरफा अंतर-प्रजाति संवाद के लिए कॉलर डुलिटिल चुनौती) का पुरस्कार यह खोजने के लिए जीता है कि ज़ेबरा फिंच अपनी आवाज़ों (कॉल्स) को उसकी ध्वनि (अकॉस्टिक्स) के बजाय उसके अर्थ के आधार पर अधिक वर्गीकृत करती हैं।

उनके शोध से यह पता चला है कि ये पक्षी कैसे यह बताते हैं कि वे कौन हैं और क्या कर रहे हैं, साथ ही वे अपनी ‘व्यक्तिगत पहचान’ (इंडिविजुअल सिग्नेचर) का उपयोग करके एक-दूसरे को पहचान लेते हैं, चाहे वे कुछ भी कह रहे हों। उन्होंने यह भी पाया कि कई बार ये पक्षी एक जैसी ध्वनि वाली आवाज़ों की तुलना में समान अर्थ वाली आवाज़ों को लेकर अधिक भ्रमित हो जाते थे।

कॉलर डुलिटिल चैलेंज पुरस्कार के बारे में

कॉलर डुलिटिल चैलेंज पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 2024 में ब्रिटेन के ‘जेरेमी कॉलर फाउंडेशन’ द्वारा तेल अवीव यूनिवर्सिटी के सहयोग से की गई थी। यह फाउंडेशन पशु कल्याण और पशुओं की चेतना (एनिमल सेंटिएंस) के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देता है। इस दिशा में प्रगति के लिए दिए जाने वाले वार्षिक पुरस्कारों के अलावा, फाउंडेशन ने इंसानों और जानवरों के बीच दोतरफा संवाद की पहेली को सुलझाने (क्रैक करने) के लिए $10 मिलियन (1 करोड़ डॉलर) का एक ग्रैंड प्राइज भी रखा है।

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