भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) लागू हुआ
भारत–यूनाइटेड किंगडम (UK) व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) 15 अप्रैल 2026 से लागू हो गया। इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा पर दोहरा अंशदान अभिसमय (Double Contribution Convention: DCC) भी प्रभावी हो गया।
- CETA के तहत भारत के लगभग 99% निर्यात को ब्रिटेन के बाजार में शून्य सीमा शुल्क (Zero Duty) का लाभ मिलेगा। इससे दोनों देशों के लगभग पूरे व्यापार को लाभ मिलेगा।
- भारत ने 89.5% टैरिफ लाइनों पर शुल्क में रियायत देने पर सहमति दी है, जिससे ब्रिटेन के 91% निर्यात को फायदा होगा। वहीं डेयरी, अनाज, दालें, खाद्य तेल, सेब और कुछ रणनीतिक उद्योगों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षण दिया गया है।
- ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भारत ने कोटा-आधारित और चरणबद्ध उदारीकरण अपनाया है। इससे सस्ती गाड़ियों की सुरक्षा बनी रहेगी और प्रीमियम वाहनों के लिए बाजार धीरे-धीरे खोला जाएगा।
- इस समझौते से भारतीय सेवा क्षेत्र को भी बड़ा लाभ मिलेगा। इसमें 12 प्रमुख सेवा क्षेत्रों और 137 उप-क्षेत्रों में बेहतर बाजार पहुँच मिलेगी।
- यह समझौता व्यावसायिक आगंतुकों, निवेशकों, कंपनी के अंदर स्थानांतरित कर्मचारियों, अनुबंध आधारित सेवा प्रदाताओं और स्वतंत्र पेशेवरों के अस्थायी आवागमन को भी आसान बनाएगा।
- भारत और ब्रिटेन ने नर्सिंग, लेखांकन (अकाउंटेंसी) और वास्तुकला (आर्किटेक्चर) के क्षेत्र में पारस्परिक मान्यता समझौते (Mutual Recognition Agreements–MRAs) एक वर्ष के भीतर करने पर सहमति जताई है।
- डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (DCC) के तहत, 60 महीने तक ब्रिटेन में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को दोहरी सामाजिक सुरक्षा अंशदान (Dual Social Security Contribution) नहीं देना होगा।
- DCC से 75,000 से अधिक भारतीय पेशेवरों और लगभग 900 भारतीय कंपनियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे हर वर्ष 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की बचत होने का अनुमान है।
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